इंदिरा गाँधी नहर परियोजना (Indira Gandhi Canal Project)
यह भारत की सबसे बड़ी नहर प्रणाली है, जिसे ‘राजस्थान की जीवन रेखा’ या ‘मरुगंगा’ भी कहा जाता है। इसने पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके की कायापलट कर दी है।
- परिचय और मुख्य तथ्य
- पुराना नाम: राजस्थान नहर
- नया नाम: 2 नवंबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की मृत्यु के बाद इसका नाम इंदिरा गाँधी नहर परियोजना (IGNP) कर दिया गया।
- प्रेरणा/विचार: बीकानेर रियासत के महाराजा श्री शार्दूल सिंह ने भारत सरकार के सामने पश्चिमी राजस्थान में पानी लाने का विचार रखा था।
- मुख्य अभियंता (जनक): श्री कंवर सेन (इन्हें इस परियोजना का जनक माना जाता है)। उन्होंने 1948 में “बीकानेर राज्य में पानी की आवश्यकता” नामक एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
- उद्घाटन: तत्कालीन गृह मंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने 31 मार्च 1958 को इसका उद्घाटन किया।
- उद्गम स्थल: यह नहर पंजाब में सतलुज और व्यास नदियों के संगम पर बने हरिके बैराज से निकलती है।
नहर का निर्माण और संरचना
इस नहर का निर्माण मुख्य रूप से दो चरणों में पूरा हुआ। इसकी कुल लम्बाई 649 किलोमीटर है।
1. राजस्थान फीडर नहर:
- लम्बाई: 204 किलोमीटर
- विस्तार: यह हरिके बैराज (पंजाब) से लेकर हनुमानगढ़ के मसीतावाली हैड तक है।
- विशेषता: इस हिस्से में पानी का कोई उपयोग नहीं होता है; इसका काम सिर्फ पानी को मुख्य नहर तक पहुँचाना है।
2. मुख्य नहर:
- लम्बाई: 445 किलोमीटर
- विस्तार: यह मसीतावाली हैड (हनुमानगढ़) से शुरू होकर जैसलमेर के मोहनगढ़ तक जाती है।
- अंतिम छोर: इसका अंतिम बिंदु बाड़मेर में गडरा रोड़ तक बढ़ाया गया है, जिसे बाबा रामदेव उपशाखा कहा जाता है।
निर्माण के चरण :
प्रथम चरण (Phase I):
- क्या बना: राजस्थान फीडर नहर (204 किमी), मुख्य नहर (189 किमी) और लगभग 3075 किमी लंबी वितरण प्रणाली।
- सिंचाई क्षमता: 5.53 लाख हेक्टेयर।
- लाभान्वित जिले: गंगानगर, हनुमानगढ़ और बीकानेर का उत्तरी-पश्चिमी भाग।
द्वितीय चरण (Phase II):
- क्या बना: 256 किमी लंबी मुख्य नहर (मोहनगढ़ तक) और लगभग 5606 किमी लंबी वितरण प्रणाली।
- सिंचाई क्षमता: 14.10 लाख हेक्टेयर।
- लाभान्वित जिले: बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, नागौर और चूरू।
लिफ्ट नहरें (Lift Canals)
चूंकि नहर के बाईं ओर की भूमि नहर के जल स्तर से ऊँची है, इसलिए पानी को पंप करके ऊपर उठाया जाता है और नहरों में छोड़ा जाता है। इन्हें लिफ्ट नहर कहते हैं। इनकी कुल संख्या 7 है।
| पुराना नाम | नया नाम | लाभान्वित जिले |
| लूणकरणसर लिफ्ट नहर | कंवर सेन लिफ्ट नहर | बीकानेर, गंगानगर (यह सबसे लंबी लिफ्ट नहर है) |
| गंधेली साहावा लिफ्ट नहर | चौधरी कुम्भाराम आर्य लिफ्ट नहर | हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं |
| गजनेर लिफ्ट नहर | पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट नहर | बीकानेर, नागौर |
| बांगड़सर लिफ्ट नहर | वीर तेजाजी लिफ्ट नहर | बीकानेर (यह सबसे छोटी लिफ्ट नहर है) |
| कोलायत लिफ्ट नहर | डॉ. करणी सिंह लिफ्ट नहर | जोधपुर, बीकानेर |
| फलौदी लिफ्ट नहर | गुरु जम्भेश्वर लिफ्ट नहर | जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर |
| पोकरण लिफ्ट नहर | जय नारायण व्यास लिफ्ट नहर | जैसलमेर, जोधपुर |
नोट: नहर के दाईं ओर 9 शाखाएँ (वितरिकाएँ) हैं, जहाँ पानी गुरुत्वाकर्षण (ढलान) के कारण स्वाभाविक रूप से बहता है।
परियोजना के उद्देश्य और लाभ
- सिंचाई: पश्चिमी राजस्थान के लगभग 19.63 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा प्रदान करना। इससे कृषि उत्पादन (गेहूँ, कपास, सरसों, चना) में भारी वृद्धि हुई है।
- पेयजल: करोड़ों लोगों और पशुओं के लिए पीने के पानी की समस्या का समाधान हुआ है।
- मरुस्थलीकरण पर रोक: हरियाली बढ़ने से रेगिस्तान के विस्तार पर रोक लगी है।
- आर्थिक विकास: कृषि, पशुपालन और उद्योगों को बढ़ावा मिला है, जिससे लोगों की आय बढ़ी है।
- पर्यावरणीय सुधार: क्षेत्र के तापमान में कमी आई है और नमी बढ़ी है।
- पशुपालन: चारे की उपलब्धता के कारण पशुपालन एक प्रमुख व्यवसाय बन गया है।
प्रमुख समस्याएँ और चुनौतियाँ
- सेम की समस्या (Waterlogging): पानी के लगातार रिसाव के कारण आसपास की ज़मीन दलदली हो गई है, जिससे वह खेती के लायक नहीं रही। यह हनुमानगढ़ और गंगानगर में एक बड़ी समस्या है।
- मिट्टी की लवणता (Soil Salinity): अत्यधिक सिंचाई और जल-जमाव के कारण ज़मीन में नमक की मात्रा बढ़ रही है, जिससे उसकी उर्वरता कम हो रही है।
- नहर का रखरखाव: नहर बहुत पुरानी हो चुकी है और इसके रखरखाव और मरम्मत की लगातार आवश्यकता होती है।
- जल का असमान वितरण: नहर के अंतिम छोर तक पानी की पूरी मात्रा नहीं पहुँच पाती है।
इन समस्याओं के समाधान के लिए इंडो-डच (नीदरलैंड) परियोजना के तहत प्रयास किए जा रहे हैं।