प्रमुख धार्मिक आंदोलन: बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म
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प्रमुख धार्मिक आंदोलन: बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म
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111. कथन (A): कुशीनगर मल्ल गणराज्य की राजधानी थी।कथन (R) : महात्मा बुद्ध का महापरिनिर्वाण कुशीनगर में हुआ था।
Answer: दोनों कथन अपनी-अपनी जगह सही हैं, लेकिन बुद्ध का महापरिनिर्वाण कुशीनगर में होने का कारण यह नहीं था कि वह मल्ल गणराज्य की राजधानी थी। यह एक संयोग था।
112. किसे 'एशिया की रोशनी' (The light of Asia) कहा जाता है?
Answer: गौतम बुद्ध को उनके ज्ञान और शिक्षाओं के कारण 'एशिया की रोशनी' कहा जाता है। एडविन अर्नोल्ड ने इसी नाम से एक प्रसिद्ध पुस्तक भी लिखी है।
113. किस शासक के शासनकाल में नेपाल में बौद्ध धर्म का गमन हुआ था?
Answer: सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा था, और उनके शासनकाल में ही बौद्ध धर्म नेपाल तक भी फैला।
114. जैन परम्परा के अनुसार जैन धर्म में कुल कितने तीर्थकर हुए?
Answer: जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकर हुए हैं, जो समय-समय पर लोगों को धर्म का मार्ग दिखाने के लिए अवतरित हुए। ऋषभदेव पहले और महावीर अंतिम तीर्थंकर थे।
115. बौद्ध धर्म का मूलाधार है
Answer: बौद्ध धर्म की संपूर्ण शिक्षा चार आर्य सत्यों पर आधारित है: (1) दुःख है, (2) दुःख का कारण है, (3) दुःख का निवारण संभव है, (4) दुःख निवारण का मार्ग है।
116. कौन सुमेलित नहीं है ?
Answer: राहुल बुद्ध के पुत्र का नाम था, न कि चचेरे भाई का। उनके चचेरे भाई का नाम देवदत्त था।
117. जैन धर्म श्वेताम्बर एवं दिगम्बर संप्रदायों में कब विभाजित हुआ ?
Answer: चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में मगध में पड़े अकाल के कारण, जैन संघ में मतभेद उत्पन्न हुआ और यह श्वेताम्बर (स्थूलभद्र के अनुयायी) और दिगम्बर (भद्रबाहु के अनुयायी) में विभाजित हो गया।
118. तीर्थंकरों के क्रम में अंतिम कौन थे?
Answer: भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे।
119. बौद्ध धर्म के त्रिरत्न में शामिल नहीं है
Answer: बौद्ध धर्म के त्रिरत्न हैं - बुद्ध (गुरु), धम्म (शिक्षा), और संघ (भिक्षुओं का समुदाय)। मध्यम मार्ग उनकी शिक्षा का एक हिस्सा है, लेकिन त्रिरत्न में शामिल नहीं है।
120. प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से बौद्ध धर्म और जैन धर्म दोनों में समान रूप से विद्यमान था/थे ?1. तप और मोग की अति का परिहार2. वेद-प्रामाण्य के प्रति अनास्था3. कर्मकाण्डों की फलवत्ता का निषेध निम्नलिखित कूटों के आधार पर सही उत्तर चुनिए :
Answer: दोनों धर्म वेदों को प्रमाण नहीं मानते और वैदिक कर्मकांडों का विरोध करते हैं। हालांकि, तप के मामले में जैन धर्म कठोरता (अति) का समर्थन करता है, जबकि बौद्ध धर्म मध्यम मार्ग (अति का परिहार) की बात करता है।