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भारत की राष्ट्रीय आय

भारत की राष्ट्रीय आय की अवधारणाओं जैसे GDP, GNP, NNP को समझें। राष्ट्रीय आय की गणना करने की विधियों और नवीनतम आंकड़ों के बारे में जानें।

भारत की राष्ट्रीय आय
1. नियोजन के आरम्भ में (1950-51) भारत के सकल घरेलू उत्पाद में प्राथमिक क्षेत्र द्वितीयक क्षेत्र तथा तृतीयक क्षेत्र का योगदान (1993-94 की कीमतों पर)क्रमश: 55.11,13.34 तथा 29.55 प्रतिशत था जो 2014-15 के दौरान परिवर्तित होकर क्रमश: हो गया
  • A.17.5%',31.8%'.50.7%'
  • B.22.1%',26.9%',51.0%'
  • C.22.2%',21.8%'56.0%'
  • D.22.8%',34.5%',42.7%'
Answer: आज़ादी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि (प्राथमिक क्षेत्र) पर निर्भर थी, लेकिन धीरे-धीरे विकास के साथ, उद्योग (द्वितीयक क्षेत्र) और सेवा (तृतीयक क्षेत्र) का योगदान बढ़ता गया। 2014-15 तक, सेवा क्षेत्र सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन गया, उसके बाद उद्योग और फिर कृषि।
2. प्रति व्यक्ति आय निकालने के लिए राष्ट्रीय आय को भाग दिया जाता है -
  • A.देश की कुल जनसँख्या से
  • B.कुल कार्यशील जनसँख्या से
  • C.देश के क्षेत्रफल से
  • D.प्रयुक्त पूँजी के परिमाण से
Answer: प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) का मतलब है कि देश के हर व्यक्ति की औसत आय कितनी है। इसे निकालने के लिए देश की कुल राष्ट्रीय आय को उसकी कुल जनसंख्या से भाग दिया जाता है।
3. सकल घरेलु उत्पाद इसका मुद्रा मूल्य है-
  • A.वस्तुओं और सेवाओं के स्टॉक का
  • B.एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का
  • C.केवल बाजार के लिए उत्पादित वस्तुओं का
  • D.बाजार के लिए और अपने उपयोग के लिए उत्पादित वस्तुओं का
Answer: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) एक वित्तीय वर्ष के दौरान किसी देश की सीमाओं के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य है। इसमें मध्यवर्ती वस्तुओं को शामिल नहीं किया जाता ताकि दोहरी गणना से बचा जा सके।
4. GNP से NNP निकालने के लिए निम्न में से किसको घटाया जाता है ?
  • A.ह्रास
  • B.ब्याज
  • C.कर
  • D.इमदाद
Answer: GNP (सकल राष्ट्रीय उत्पाद) में से जब ह्रास (Depreciation) यानी उत्पादन प्रक्रिया के दौरान मशीनों और पूंजी में हुई टूट-फूट या घिसावट को घटा दिया जाता है, तो हमें NNP (शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद) प्राप्त होता है।
5. राष्ट्रीय आय के मापन की विधि नहीं है -
  • A.मूल्य वर्धित विधि
  • B.आय विधित
  • C.निवेश विधि
  • D.व्यय विधि
Answer: राष्ट्रीय आय को मापने की तीन मुख्य विधियाँ हैं: उत्पाद विधि (मूल्य वर्धित विधि), आय विधि, और व्यय विधि। निवेश विधि राष्ट्रीय आय के मापन की कोई अलग विधि नहीं है।
6. स्वतंत्रता पूर्व भारत की राष्ट्रीय आय के संम्बंध में किसने अनुमान लगाये थे ?
  • A.नेशनल सेम्पुल सर्वे ने
  • B.केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन ने
  • C.नौरोजी व शिराज ने
  • D.उपर्युक्त सभी ने
Answer: स्वतंत्रता से पहले, दादाभाई नौरोजी ने पहली बार वैज्ञानिक तरीके से भारत की राष्ट्रीय आय का अनुमान लगाया था। उनके अलावा, फिंडले शिराज जैसे अन्य अर्थशास्त्रियों ने भी इस पर काम किया।
7. वर्तमान में भारत की राष्ट्रीय आय में किस क्षेत्र का सर्वाधिक योगदान है ?
  • A.कृषि
  • B.उद्योग
  • C.अवस्थापना
  • D.सेवाएँ
Answer: वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र (Tertiary Sector), जिसमें बैंकिंग, आईटी, संचार, परिवहन आदि शामिल हैं, का राष्ट्रीय आय में सबसे अधिक योगदान है।
8. भारत में राष्ट्रीय आय की गणना में किस विधि का प्रयोग किया जाता है ?
  • A.उत्पति गणना विधि
  • B.आय विधि
  • C.उपर्युक्त दोनों
  • D.इनमे से कोई नहीं
Answer: भारत में राष्ट्रीय आय की गणना के लिए केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) एक मिश्रित विधि का उपयोग करता है। इसमें उत्पत्ति (या उत्पाद) विधि और आय विधि दोनों का संयोजन होता है ताकि सटीक आंकड़े प्राप्त किए जा सकें।
9. सकल घरेलु उत्पाद के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए 1. यह एक वर्ष में एक देश की सीमाओं के अंदर बनी सभी वस्तुओं एवं दी गई सेवाओं का बाजार मूल्य है 2. यह एक अनुबद्ध समय अवधि में देश के अंदर उत्पादित समस्त अन्य वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए कुल व्ययों के बराबर है उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है
  • A.केवल 1
  • B.केवल2
  • C.केवल 1 और 2 दोनों
  • D.न तो 1 और न ही 2
Answer: पहला कथन GDP की सही परिभाषा है। दूसरा कथन अधूरा और अस्पष्ट है क्योंकि यह 'अन्य' वस्तुओं और 'कुल व्ययों' को ठीक से परिभाषित नहीं करता। GDP की गणना व्यय विधि से की जा सकती है, लेकिन यह कथन उस परिभाषा को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं करता है।
10. भारत में राष्ट्रीय आय की सही संगणना में आने वाली एक कठिनाई है -
  • A.अमौद्रिक क्षेत्र का अस्तित्व
  • B.बचत की निम्न दर्रे
  • C.अर्द्ध बेरोजगारी
  • D.मुद्रा स्फीति
Answer: अमौद्रिक क्षेत्र का मतलब अर्थव्यवस्था का वह हिस्सा है जहाँ वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान पैसे के बिना (वस्तु विनिमय) होता है। चूँकि इन लेन-देनों का कोई मौद्रिक रिकॉर्ड नहीं होता, इसलिए इन्हें राष्ट्रीय आय में शामिल करना मुश्किल होता है।