भारतीय दर्शन, दार्शनिक मत और उनके प्रवर्तक
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QUESTION 11
द्वैताद्वैत सिद्धांत के प्रवर्तक हैं-
Answer: द्वैताद्वैत (भेद और अभेद) सिद्धांत के प्रवर्तक निम्बकाचार्य थे। यह सिद्धांत मानता है कि आत्मा और परमात्मा में द्वैत (भिन्नता) और अद्वैत (एकता) दोनों का संबंध है।
QUESTION 12
रामानुजाचार्य किससे संम्बन्धित है?
Answer: रामानुजाचार्य 'विशिष्टाद्वैत' दर्शन के प्रवर्तक थे। इसके अनुसार, ब्रह्म एक ही है, लेकिन जीव और जगत उसी ब्रह्म के विशिष्ट अंग हैं।
QUESTION 13
निम्नलिखित मे से कौन-सा दर्शन भागवत धर्म का प्रमुख आधार है ?
Answer: विशिष्टाद्वैत दर्शन, जिसे रामानुजाचार्य ने प्रतिपादित किया, भागवत धर्म का मुख्य दार्शनिक आधार है। यह भक्ति और ईश्वर की शरण में जाने पर जोर देता है।
QUESTION 14
भक्ति को दार्शनिक आधार प्रदान करने वाले प्रथम आचार्य कौन थे?
Answer: रामानुजाचार्य पहले ऐसे आचार्य थे जिन्होंने भक्ति को एक मजबूत दार्शनिक आधार (विशिष्टाद्वैत) प्रदान किया और इसे ज्ञान और कर्म के बराबर महत्वपूर्ण बताया।
QUESTION 15
भारत का प्राचीनतम दर्शन है -
Answer: सांख्य दर्शन को भारत का सबसे प्राचीनतम दर्शन माना जाता है। इसके सिद्धांत उपनिषदों और गीता में भी पाए जाते हैं।
QUESTION 16
अद्वैतवाद सिधांत के प्रतिपादक कौन हैं?
Answer: अद्वैतवाद सिद्धांत के प्रतिपादक आदि शंकराचार्य थे। यह सिद्धांत कहता है कि आत्मा और परमात्मा (ब्रह्म) एक ही हैं, और संसार एक भ्रम (माया) है।
QUESTION 17
योग दर्शन के प्रतिपादक कौन है ?
Answer: योग दर्शन का प्रतिपादन महर्षि पतंजलि ने अपने ग्रंथ 'योगसूत्र' में किया था। यह दर्शन मन और शरीर को नियंत्रित करके मोक्ष प्राप्त करने का मार्ग बताता है।
QUESTION 18
महर्षि कपिल का नाम दर्शन की किस विधि से जुड़ा हुआ है?
Answer: महर्षि कपिल का नाम सांख्य दर्शन से जुड़ा है। वे इस दर्शन के संस्थापक माने जाते हैं, जो सृष्टि की व्याख्या 'पुरुष' और 'प्रकृति' के आधार पर करता है।
QUESTION 19
द्वैतवाद सिद्धांत के प्रतिपादक हैं
Answer: द्वैतवाद सिद्धांत के प्रतिपादक माधवाचार्य थे। यह सिद्धांत मानता है कि आत्मा (जीव) और परमात्मा (ब्रह्म) दो अलग और स्वतंत्र सत्ताएं हैं।
QUESTION 20
शून्यवाद के प्रतिपादक कौन माने जाते हैं
Answer: शून्यवाद, जो महायान बौद्ध धर्म का एक प्रमुख सिद्धांत है, के प्रतिपादक नागार्जुन माने जाते हैं। इसके अनुसार, सभी वस्तुएं स्वभाव से शून्य (खाली) हैं।