ब्रिटिश शासन का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
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1857 का विद्रोह (प्रथम स्वतंत्रता संग्राम)
आधुनिक भारत: विविध तथ्य (गवर्नर-जनरल, नारे)
गांधीवादी युग (राष्ट्रीय आंदोलन)
प्रमुख किसान एवं जनजातीय आंदोलन
ब्रिटिश शासन का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
ब्रिटिश सत्ता का विस्तार
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन: उदारवादी चरण
सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन
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61. ब्रिटिश सरकार ने भारत में स्थायी बंदोबस्त कब लागू किया ?
Answer: स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement) को गवर्नर-जनरल लॉर्ड कॉर्नवॉलिस द्वारा 1793 में बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू किया गया था। इसके तहत जमींदारों को भूमि का स्वामी मानकर लगान की दर हमेशा के लिए निश्चित कर दी गई।
62. 'भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा (महाअधिकार पत्र)' कहा जाता है?
Answer: सर चार्ल्स वुड के 1854 के घोषणापत्र को 'भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा' कहा जाता है क्योंकि इसने प्राथमिक से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक शिक्षा के लिए एक व्यापक और व्यवस्थित योजना प्रस्तुत की थी।
63. 1938 ई० के अंत में भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के अनुरोध पर जो राष्ट्रीय योजना समिति बनायी गयी उसके अध्यक्ष थे ?
Answer: 1938 में कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चंद्र बोस के अनुरोध पर राष्ट्रीय योजना समिति (National Planning Committee) का गठन किया गया था, और इसके अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू को बनाया गया था।
64. ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने चाय के व्यापारिक एकाधिकार को खो दिया
Answer: 1813 के चार्टर एक्ट ने कंपनी का भारतीय व्यापार पर एकाधिकार समाप्त कर दिया था, लेकिन चाय और चीन के साथ व्यापार पर एकाधिकार बना रहा। 1833 के चार्टर एक्ट द्वारा चाय और चीन के साथ व्यापार के एकाधिकार को भी पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।
65. भारत में प्रथम रेलवे लाईन किस ब्रिटिश गवर्नर जनरल के समय बिछाई गई थी ?
Answer: भारत में रेलवे की शुरुआत लॉर्ड डलहौजी के कार्यकाल में हुई थी। उन्हें 'भारतीय रेलवे का जनक' भी कहा जाता है। पहली यात्री ट्रेन 1853 में उनके समय में ही चली थी।
66. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए...
Answer: यह प्रश्न भू-राजस्व व्यवस्थाओं और उनसे जुड़े व्यक्तियों का सही मिलान है: स्थायी बंदोबस्त (कॉर्नवालिस), रैयतवाड़ी व्यवस्था (कैप्टन रीड, टॉमस मुनरो), महालवाड़ी व्यवस्था (होल्ट मैकेंजी, मार्टिन बर्ड)।
67. निम्नलिखित में से कौन-सा एक भारत में ब्रिटिश उपनिवेशी शासन का परिणाम नहीं था?
Answer: ब्रिटिश शासन ने भारतीय कृषि, उद्योग और व्यापार को नष्ट कर दिया, लेकिन उन्होंने भारतीय सामंतवाद (जैसे जमींदारी और रियासतें) को नष्ट नहीं किया, बल्कि अपने शासन को मजबूत करने के लिए उनका इस्तेमाल किया।
68. हमारी पद्धति बहुत कुछ स्पंज की तरह काम करती है; यह गंगा के तटों से सभी अच्छी चीजों को सोख लेती हैं और टेम्स के तटों पर उन्हें निचोड़कर गिरा देती है—यह उक्ति किसकी है?
Answer: यह प्रसिद्ध कथन जॉन सुलिवन का है, जो मद्रास प्रेसीडेंसी के एक ब्रिटिश अधिकारी थे। उन्होंने इस उपमा का प्रयोग भारत से ब्रिटेन की ओर हो रहे धन के निकास (Drain of Wealth) की प्रक्रिया को समझाने के लिए किया था।
69. वर्ष 1853 ई० में लार्ड डलहौजी ने जो पहली टेलीग्राफ लाइन शुरु की, वह किसके बीच थी ?
Answer: भारत में पहली प्रायोगिक टेलीग्राफ लाइन 1851 में कलकत्ता और डायमंड हार्बर के बीच शुरू हुई थी, लेकिन पहली लंबी दूरी की टेलीग्राफ लाइन 1853 में कलकत्ता और आगरा के बीच खोली गई थी।
70. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए...
Answer: यह प्रश्न विभिन्न भूमि प्रणालियों और उनकी विशेषताओं का सही मिलान है: जागीरदारी (बड़े सामंतों को भूमि), जमींदारी (मालगुजारी के इजारेदारों को भूमि), रैयतवाड़ी (प्रत्येक किसान को भूमि), और महालवाड़ी (ग्राम स्तर पर बंदोबस्त)।
71. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक अधिकार अतिम रूप से किस एक्ट के तहत समाप्त किया गया ?
Answer: 1833 के चार्टर एक्ट ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को एक व्यापारिक निकाय के रूप में पूरी तरह से समाप्त कर दिया और उसे एक विशुद्ध प्रशासनिक निकाय बना दिया। इसके तहत चाय और चीन के साथ व्यापार का एकाधिकार भी खत्म हो गया।
72. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :दादाभाई नौरोजी की भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को सर्वाधिक प्रभावी देन थी कि...
Answer: दादाभाई नौरोजी का भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में सबसे महत्वपूर्ण योगदान उनका 'धन के निकास' का सिद्धांत था। उन्होंने आंकड़ों और तर्कों के माध्यम से यह साबित किया कि कैसे ब्रिटेन भारत का आर्थिक शोषण कर रहा है, जिसने भारतीय राष्ट्रवाद को एक मजबूत आर्थिक आधार प्रदान किया।
73. यद्यपि भारत के व्यापार पर 1813 के चार्टर एक्ट द्वारा कंपनी के एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया, परन्तु फिर भी किस वस्तु का व्यापार केवल कंपनी के लिए ही सुरक्षित रखा गया?
Answer: 1813 के चार्टर एक्ट ने भारत में कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त कर दिया, लेकिन दो चीजों को अपवाद के रूप में रखा गया: चाय का व्यापार और चीन के साथ व्यापार। इन पर कंपनी का एकाधिकार बना रहा।
74. 'उत्तरी भारत में भूमिकर व्यवस्था का प्रवर्तक' (The Father of Land Settlement in Northern India) किसे कहा जाता है
Answer: रॉबर्ट मर्टिन्स बर्ड को उत्तरी भारत में भू-राजस्व व्यवस्था (विशेष रूप से महालवाड़ी प्रणाली) में उनके व्यापक सुधारों और व्यवस्थित सर्वेक्षणों के लिए 'उत्तरी भारत में भूमिकर व्यवस्था का प्रवर्तक' कहा जाता है।
75. 20वीं सदी के पूर्वार्द्ध में देश का भीषणतम अकाल 1942-43 में कहाँ पड़ा?
Answer: 1943 का बंगाल का अकाल आधुनिक भारतीय इतिहास के सबसे विनाशकारी अकालों में से एक था। द्वितीय विश्व युद्ध, प्रशासनिक विफलताओं और प्राकृतिक कारणों से हुए इस अकाल में लाखों लोगों की मृत्यु हुई।
76. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए...
Answer: यह प्रश्न ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विभिन्न चरणों और उनकी विशेषताओं का सही मिलान है: वाणिज्यिक चरण (व्यापार पर एकाधिकार), औद्योगिक चरण (मुक्त व्यापार), और वित्तीय पूंजीवाद (पूंजी निवेश)।
77. भारत में सबसे पहला सूती वस्त्र मिल किस शहर में स्थापित किया गया था ?
Answer: भारत की पहली सफल आधुनिक सूती वस्त्र मिल, 'बॉम्बे स्पिनिंग एंड वीविंग कंपनी', 1854 में कावसजी नानाभाई डावर द्वारा बंबई (अब मुंबई) में स्थापित की गई थी।
78. भारतीय दस्तकारी उद्योग के पतन के कारण थे
Answer: भारतीय दस्तकारी उद्योग के पतन के लिए सभी दिए गए कारण जिम्मेदार थे। अंग्रेजों की नीतियों ने भारतीय कारीगरों से सस्ते में माल खरीदा, कच्चे माल तक उनकी पहुँच सीमित कर दी, और विदेशी बाजारों में भारतीय माल को महंगा बना दिया।
79. स्थायी बंदोबस्त के तहत जमींदार को पूरे लगान / भूराजस्व का कितना प्रतिशत राज्य को देना तय किया गया था ?
Answer: स्थायी बंदोबस्त के तहत, यह नियम था कि जमींदार द्वारा किसानों से वसूले गए कुल लगान का 10/11वां हिस्सा (लगभग 89%) सरकार को जमा करना होगा और शेष 1/11वां हिस्सा (लगभग 11%) जमींदार अपने पास रख सकता था।
80. भारत में उपनिवेशी शासनकाल में ‘होम चार्जेज' (Home charges) भारत से संबंधित दोहन का महत्वपूर्ण अंग था । निम्नलिखित में से कौन-सी निधि/ निधियाँ होम चार्जेज की संघटक थी/थीं ?...
Answer: होम चार्जेज भारत द्वारा ब्रिटेन में किए जाने वाले भुगतानों को कहते थे। इसमें लंदन में इंडिया ऑफिस का खर्च, भारत में काम करने वाले ब्रिटिश कर्मचारियों का वेतन और पेंशन, और भारत के बाहर अंग्रेजों द्वारा लड़े गए युद्धों का खर्च शामिल था। यह धन के निकास का एक प्रमुख घटक था।