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GI Tag of Rajasthan (2026)

राजस्थान के सभी GI Tags (Rajasthan GI Tags Complete List)

GI Tag of Rajasthan :राजस्थान अपनी समृद्ध संस्कृति, शाही विरासत और बेमिसाल हस्तशिल्प (Handicrafts) के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। चाहे वह बीकानेर की भुजिया हो या कोटा की साड़ियाँ, हर चीज़ की अपनी एक अलग पहचान है। इसी पहचान को कानूनी रूप से सुरक्षित करने के लिए GI Tag (Geographical Indication) दिया जाता है।

यह टॉपिक RPSC (RAS, SI, EO/RO) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण (‘रामबाण’) है। इस लेख में हम राजस्थान के पहले GI Tag से लेकर नवीनतम 2026 तक के सफर को कवर करेंगे।

GI Tag क्या होता है? (What is GI Tag?)

  • परिभाषा: यह किसी उत्पाद के लिए एक “विशिष्ट पहचान पत्र” (Identity Card) जैसा है। यह उन उत्पादों को मिलता है जो किसी खास भौगोलिक क्षेत्र (Location) में उत्पन्न होते हैं और जिनमें विशेष गुणवत्ता या प्रतिष्ठा होती है।
  • अधिनियम: ‘वस्तुओं का भौगोलिक उपदर्शन (रजिस्ट्रीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999’ (Geographical Indications of Goods (Registration and Protection) Act, 1999)।
  • समय सीमा: यह 10 वर्षों के लिए मान्य होता है (बाद में रिन्यू हो सकता है)।
  • फायदा: इससे उस प्रोडक्ट की नकल (Copy) नहीं की जा सकती और स्थानीय कारीगरों को सही दाम मिलता है।

Quick Revision: राजस्थान के GI Tags की पूरी लिस्ट

क्र.सं.उत्पाद का नाम (Product Name)प्रकारजिला/स्थानवर्ष/टिप्पणी
1कोटा डोरियाहस्तशिल्पकोटा(First GI Tag)
2जयपुर ब्लू पॉटरीहस्तशिल्पजयपुर
3मोलेला क्ले वर्कहस्तशिल्पराजसमंदमिट्टी कला
4राजस्थान की कठपुतलीहस्तशिल्पउदयपुर/पूरा राजस्थान
5सांगानेरी हैंड ब्लॉक प्रिंटहस्तशिल्पजयपुर
6बीकानेरी भुजियाखाद्य सामग्रीबीकानेर
7बगरू हैंड ब्लॉक प्रिंटहस्तशिल्पजयपुर
8थेवा कलाहस्तशिल्पप्रतापगढ़
9मकराना मार्बलप्राकृतिकनागौर
10फुलकारीहस्तशिल्पराज, पंजाब, हरियाणासंयुक्त
11पोकरण पॉटरीहस्तशिल्पजैसलमेर
12सोजत की मेहंदीकृषिपालीSept 2021
13पिछवाई कलाहस्तशिल्पनाथद्वाराAug 2023
14जोधपुरी बंधेजहस्तशिल्पजोधपुरAug 2023
15कोफ्तगिरी मेटल क्राफ्टहस्तशिल्पउदयपुरAug 2023
16उस्ता कलाहस्तशिल्पबीकानेरAug 2023
17कशीदाकारी क्राफ्टहस्तशिल्पबीकानेरAug 2023
18सांगरी (Sangri)खाद्य सामग्रीराजस्थानApril 2025
19नागौरी अश्वगंधाकृषिनागौरJan 2026

(नोट: कुछ उत्पादों के ‘LOGO’ भी अलग से रजिस्टर्ड हैं, जैसे ब्लू पॉटरी लोगो, कोटा डोरिया लोगो आदि, उन्हें मिलाकर कुल संख्या 23 के आसपास हो जाती है, लेकिन मुख्य उत्पाद ऊपर दिए गए 19 हैं।)

GI Tag of Rajasthan : विस्तार से (Details)

आइये अब हर एक उत्पाद को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि परीक्षा में यहाँ से क्या प्रश्न बन सकते हैं।

1. कोटा डोरिया (Kota Doria)

Kota-Doria
Kota-Doria

स्थान: कैथून (कोटा) और मांगरोल (बारां)।

यह राजस्थान का पहला GI Tag प्राप्त उत्पाद है।

खासियत: यह सूती और रेशमी धागों के मिश्रण से बनी साड़ी है। इसकी सबसे बड़ी पहचान इसमें बने चौकोर चेक (Square Checks) हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘खत’ (Khat) कहा जाता है। यह कपड़ा बहुत हल्का और पारदर्शी होता है।

2. ब्लू पॉटरी (Blue Pottery of Jaipur)

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Blue Pottery of Jaipur

स्थान: जयपुर।

इतिहास: इसे जयपुर लाने का श्रेय राजा मानसिंह प्रथम को जाता है, लेकिन इसका सर्वाधिक विकास रामसिंह द्वितीय के काल में हुआ।

खासियत: यह दुनिया की एकमात्र ऐसी पॉटरी है जिसमें चिकनी मिट्टी (Clay) का उपयोग नहीं होता। इसे बनाने में क्वार्ट्ज पत्थर, कांच, मुल्तानी मिट्टी और साजी का प्रयोग होता है। इसमें नीला रंग (कोबाल्ट ऑक्साइड) मुख्य होता है। पद्मश्री कृपाल सिंह शेखावत इसके सबसे बड़े कलाकार थे।

3. मोलेला मिट्टी कला (Molela Clay Work)

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Molela Clay Work

स्थान: मोलेला गाँव (नाथद्वारा, राजसमंद)।

खासियत: यहाँ के कुम्हार तालाब की मिट्टी (Sol) में गधे की लीद मिलाकर मूर्तियां बनाते हैं। इसे टेराकोटा (Terracotta) कला भी कहते हैं। यहाँ मुख्य रूप से लोक देवता देवनारायण जी और अन्य धार्मिक फलक (Plaques) बनाए जाते हैं जिन्हें पकाया जाता है।

4. कठपुतली (Kathputlis of Rajasthan)

Kathputlis-of-Rajasthan
Kathputlis of Rajasthan

स्थान: मुख्य रूप से उदयपुर, चित्तौड़गढ़ और जयपुर।

विवरण: राजस्थान की कठपुतलियाँ ‘आडू’ (Ardu) की लकड़ी से बनाई जाती हैं। इन्हें नचाने वाले कलाकारों को ‘भाट’ या नट कहा जाता है। यह राजस्थान की सबसे पुरानी लोककलाओं में से एक है।

5. सांगानेरी प्रिंट (Sanganeri Print)

Sanganeri-Print
Sanganeri Print

स्थान: सांगानेर (जयपुर)।

खासियत: सांगानेरी प्रिंट हमेशा सफ़ेद मलमल के कपड़े पर की जाती है। इसमें काले और लाल रंगों का प्रयोग कर फूल-पत्तियों और बेल-बूटों की छपाई की जाती है। इसे ‘ठप्पा छपाई’ भी कहते हैं।

6. बीकानेरी भुजिया (Bikaneri Bhujia)

Bikaneri-Bhujia.
Bikaneri Bhujia

स्थान: बीकानेर।

स्वाद का राज: बीकानेरी भुजिया को बनाने में मोठ की दाल का प्रयोग होता है। कहा जाता है कि बीकानेर की जलवायु और वहां के पानी की वजह से इसमें एक अनोखा कुरकुरापन आता है। डूंगर सिंह जी के शासनकाल में इसकी शुरुआत मानी जाती है।

7. बगरू हैंड ब्लॉक प्रिंट (Bagru Print)

Bagru-Print
Bagru Print

स्थान: बगरू (जयपुर)।

पहचान: सांगानेरी प्रिंट के विपरीत, बगरू प्रिंट में पृष्ठभूमि (Background) रंगीन होती है। इसमें प्राकृतिक रंगों (Natural Dyes) का प्रयोग होता है।

तकनीक: यह ‘दाबू प्रिंट’ (मिट्टी और गोंद लगाकर रंग को रोकना) के लिए भी जानी जाती है।

8. थेवा कला (Thewa Art Work)

Thewa-Art-Work
Thewa Art Work

स्थान: प्रतापगढ़।

विवरण: यह बहुत ही सूक्ष्म और राजसी कला है। इसमें रंगीन कांच (बेल्जियम ग्लास) पर सोने (Gold) का काम किया जाता है।

खास बात: यह कला केवल प्रतापगढ़ के ‘राजसोनी परिवार’ तक ही सीमित है, जिन्होंने पीढ़ियों से इस कला के रहस्य को बचाकर रखा है।

9. मकराना संगमरमर (Makrana Marble)

Makrana-Marble
Makrana Marble

स्थान: मकराना (नागौर/डीडवाना-कुचामन)।

महत्व: यह दुनिया का सबसे बेहतरीन क़्वालिटी का मार्बल माना जाता है (कैल्साइट किस्म)। आगरा का ताजमहल और कोलकाता का विक्टोरिया मेमोरियल इसी पत्थर से बने हैं। यह समय के साथ पीला नहीं पड़ता, बल्कि और चमकता है।

10. पोकरण पॉटरी (Pokaran Pottery)

Pokaran-Pottery
Pokaran Pottery

स्थान: पोकरण (जैसलमेर)।

विवरण: यह लाल और सफ़ेद मिट्टी से बनी पॉटरी है। इसमें ज्यामितीय आकारों (Geometric patterns) का प्रयोग किया जाता है। यह अपनी सादगी और उपयोगिता के लिए जानी जाती है।

11. सोजत मेहंदी (Sojat Mehndi)

Sojat-Mehndi
Sojat Mehndi

वर्ष: Sept 2021

स्थान: सोजत (पाली)।

खासियत: सोजत को ‘मेहंदी नगरी’ कहा जाता है। यहाँ की मिट्टी और बारिश के पानी से उगने वाली मेहंदी में ‘लॉसोन’ (Lawsone) की मात्रा अधिक होती है, जिससे इसका रंग गहरा लाल रचता है। इसमें किसी भी तरह के केमिकल की मिलावट नहीं की जाती।

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12. नाथद्वारा पिछवाई कला (Pichhwai Art) – राजसमंद:

Pichhwai-Art
Pichhwai Art

यह कपड़े या कागज पर बनी पेंटिंग है जो श्रीनाथजी (भगवान कृष्ण) की मूर्ति के पीछे सजाई जाती है। इसमें गायों, कमलों और कृष्ण लीलाओं का चित्रण होता है।

13. जोधपुरी बंधेज (Jodhpur Bandhej) – जोधपुर:

Jodhpur-Bandhej
Jodhpur Bandhej

यह ‘टाई एंड डाई’ (Tie and Dye) कला है। कपड़े को नाख़ून या धागे से बहुत बारीकी से बांधकर रंगा जाता है। जोधपुर का बंधेज अपने चटक रंगों और पैटर्न के लिए प्रसिद्ध है।

14. उदयपुर कोफ्तगिरी (Udaipur Koftgari) – उदयपुर:

Udaipur-Koftgari
Udaipur Koftgari

यह हथियारों को सजाने की कला है। लोहे या फौलाद की सतह को खुरचकर उस पर सोने या चांदी के महीन तार भरे जाते हैं। पुराने समय में तलवारों की मूठ और ढाल को इससे सजाया जाता था।

15. बीकानेर उस्ता कला (Bikaner Usta Kala) – बीकानेर:

Bikaner-Usta-Kala
Bikaner Usta Kala

इसे ‘मुनव्वती कला’ भी कहते हैं। ऊंट की खाल (Camel Hide) पर सोने (Gold) की मीनाकारी और नक्काशी करना उस्ता कला कहलाता है। हिस्सामुद्दीन उस्ता इसके प्रसिद्ध कलाकार थे।

16. बीकानेर कशीदाकारी (Bikaner Kashidakari) – बीकानेर:

Bikaner-Kashidakar
Bikaner Kashidakar

यह मेघवाल समुदाय द्वारा की जाने वाली कढ़ाई है। इसमें कपड़े पर लाल, बैंगनी और सुनहरे धागों से बारीक टांके लगाए जाते हैं। यह अक्सर शादियों में उपहार देने वाली वस्तुओं पर की जाती है।

    नवीनतम GI Tags (Current Affairs 2025-2026)

    ये वो टॉपिक्स हैं जो अभी किताबों में अपडेट नहीं हुए हैं, लेकिन परीक्षा में आ सकते हैं।

    17. सांगरी (Sangri) – April 2025

    Sangri
    Sangri
    • श्रेणी: खाद्य सामग्री।
    • महत्व: ‘खेजड़ी’ वृक्ष (राजस्थान का राज्य वृक्ष) की फलियों को सुखाकर सांगरी बनाई जाती है। ‘केर-सांगरी’ राजस्थान की सबसे प्रसिद्ध सब्जी है। इसे ‘रेगिस्तान का मेवा’ (Dry Fruit of Desert) भी कहा जाता है। अकाल के समय यह जीवनरक्षक भोजन हुआ करता था।

    18. नागौरी अश्वगंधा (Nagauri Ashwagandha) – Jan 2026

    Nagauri-Ashwagandha
    Nagauri Ashwagandha
    • श्रेणी: कृषि उत्पाद।
    • स्थान: नागौर।
    • खासियत: नागौर की सूखी जलवायु में पैदा होने वाली अश्वगंधा की जड़ों में औषधीय गुण (Alkaloids) सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। यह तनाव कम करने और ताकत बढ़ाने वाली दवाओं में प्रयोग होती है। यह राजस्थान का सबसे नया (Latest) GI Tag है।

    निष्कर्ष (Conclusion)

    राजस्थान के GI Tags न केवल हमारी विरासत को संजो रहे हैं, बल्कि “Vocal for Local” को भी बढ़ावा दे रहे हैं। परीक्षा की दृष्टि से आपको मुख्य रूप से पहला (कोटा डोरिया), नवीनतम (नागौरी अश्वगंधा) और जिलेवार सूची याद रखनी चाहिए।