कारक की परिभाषा: संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका सम्बन्ध वाक्य के अन्य शब्दों (विशेषकर क्रिया) से जाना जाए, उसे कारक कहते हैं। सरल शब्दों में — वाक्य में संज्ञा का क्रिया के साथ जो सम्बन्ध होता है, वही कारक है।
उदाहरण: “राम ने सेब खाया।” — यहाँ ‘राम ने’ कर्ता कारक है क्योंकि काम करने वाला राम है।
हिन्दी व्याकरण में कारक के 8 भेद होते हैं। प्रत्येक कारक का अपना विभक्ति चिह्न (परसर्ग) होता है जो उसे पहचानने में सहायता करता है।
| कारक | विभक्ति चिह्न | पहचान |
|---|---|---|
| कर्ता कारक | ने | काम करने वाला |
| कर्म कारक | को | जिस पर काम हो |
| करण कारक | से, के द्वारा | साधन/माध्यम |
| सम्प्रदान कारक | को, के लिए | जिसके लिए कुछ किया जाए |
| अपादान कारक | से (अलगाव) | जहाँ से अलगाव हो |
| सम्बन्ध कारक | का, के, की, रा, रे, री | सम्बन्ध बताना |
| अधिकरण कारक | में, पर | स्थान/समय का आधार |
| सम्बोधन कारक | हे!, अरे!, ओ! | किसी को पुकारना |
SSC, Railways और राज्य परीक्षाओं में करण और अपादान कारक का अंतर सबसे अधिक पूछा जाता है। दोनों में ‘से’ विभक्ति आती है, लेकिन अर्थ अलग होता है।
दोनों में ‘को’ विभक्ति लगती है, इसलिए परीक्षा में भ्रम होता है:
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