राजस्थान के इतिहास के प्रमुख स्रोत
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किसान एवं आदिवासी आन्दोलन
गुर्जर प्रतिहार वंश
चौहान वंश
प्रजामंडल आंदोलन
ब्रिटिश शासन के दौरान प्रेस और पत्रकारिता
महाजनपद काल में राजस्थान
मेवाड़ का गुहिल वंश
राजपूत युग
राजस्थान का एकीकरण
राजस्थान की मध्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था
राजस्थान की रियासतें एवं ब्रिटिश संधियाँ
राजस्थान के अन्य राजवंश
राजस्थान के इतिहास के प्रमुख स्रोत
राजस्थान में 1857 की क्रांति
राठौड़ वंश
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गठित संगठन
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101. कौन पृथ्वीराज चौहान तृतीय का दरबारी विद्वान नहीं था -
Answer: विद्यापति गौड़, वागीश्वर जनार्दन और विश्वरूप पृथ्वीराज चौहान तृतीय के दरबारी विद्वान थे, जबकि सारंगधर का संबंध हम्मीर देव चौहान से है।
102. राजस्थान के कौन से ताम्रपत्र से रानी कर्मवती द्वारा जौहर के प्रमाण मिलते हैं -
Answer: पुर ताम्रपत्र (1535 ई.) एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत है जो गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह के आक्रमण के समय रानी कर्मावती द्वारा किए गए जौहर से पहले दिए गए भूमि-अनुदान का प्रमाण प्रस्तुत करता है।
103. निम्नलिखित में से कौन-सा मण्डोर के प्रतिहारों के इतिहास की जानकारी देता है -
Answer: घटियाला (जोधपुर) से प्राप्त अभिलेख मंडोर के प्रतिहार शासकों, विशेष रूप से कक्कुक के बारे में जानकारी का एक प्रमुख स्रोत है।
104. निम्नलिखित में से कौनसा सोमेश्वर के इतिहास का स्त्रोत है -
Answer: जयानक द्वारा रचित 'पृथ्वीराज विजय' में पृथ्वीराज चौहान तृतीय के साथ-साथ उनके पिता सोमेश्वर के शासनकाल और इतिहास की भी जानकारी मिलती है।
105. ‘पृथ्वीराज विजय’ का लेखक कौन था -
Answer: जयानक भट्ट, पृथ्वीराज चौहान तृतीय के दरबारी कवि थे, जिन्होंने संस्कृत महाकाव्य 'पृथ्वीराज विजय' की रचना की थी।
106. बिजौलिया अभिलेख किस भाषा में है -
Answer: 1170 ई. का बिजौलिया अभिलेख संस्कृत भाषा में लिखा गया है और यह चौहानों के इतिहास के अध्ययन के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत है।
107. जिस ‘बही’ में राजा की दैनिक चर्या का उल्लेख होता है उसे क्या कहा जाता है -
Answer: रियासती रिकॉर्ड में, 'हकीकत बही' में राजा की दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों, यात्राओं और अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का लेखा-जोखा रखा जाता था।
108. मौखरी यूप अभिलेख (238 ई.) निम्न में से कहाँ से प्राप्त हुए हैं -
Answer: मौखरी वंश से संबंधित यूप (यज्ञ स्तंभ) अभिलेख कोटा के बड़वा नामक स्थान से प्राप्त हुए हैं, जो उनके द्वारा किए गए यज्ञों का प्रमाण हैं।
109. पृथ्वीराज विजय किसकी रचना है -
Answer: 'पृथ्वीराज विजय' के लेखक जयानक थे, जो पृथ्वीराज चौहान तृतीय के राजकवि थे। यह ग्रंथ संस्कृत भाषा में है।
110. किस शिलालेख में चौहानों को वत्सगोत्र के ब्राह्मण कहा गया है -
Answer: बिजौलिया शिलालेख (1170 ई.) में चौहान वंश के शासकों को 'वत्सगोत्रीय ब्राह्मण' बताया गया है, जो उनकी उत्पत्ति का एक महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है।
111. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए -पुस्तक लेखकअ. हम्मीर हठ 1. चन्द्रशेखरब. हम्मीर महाकाव्य 2. नयन चन्द्र सूरीस. कान्हड़ दे-प्रबन्ध 3. जयानकद. पृथ्वीराज विजय 4. पद्मनाभअ, ब, स, द
Answer: सही सुमेलन इस प्रकार है: हम्मीर हठ - चन्द्रशेखर, हम्मीर महाकाव्य - नयन चन्द्र सूरी, कान्हड़ दे-प्रबन्ध - पद्मनाभ, पृथ्वीराज विजय - जयानक।
112. ‘बीकानेर के राठौड़ री ख्यात’ के लेखक कौन थे -
Answer: दयालदास सिढायच ने 'बीकानेर के राठौड़ री ख्यात' की रचना की थी, जो बीकानेर के राठौड़ वंश का एक विस्तृत ऐतिहासिक विवरण है।
113. चिरवा शिलालेख किस राजवंश के शासकों का उल्लेख करता है -
Answer: उदयपुर के पास स्थित चिरवा शिलालेख मेवाड़ के गुहिल वंश के शासकों की वंशावली और उनकी उपलब्धियों का वर्णन करता है।
114. किस फारसी साहित्य से रणथम्भोर पर मुस्लिम आक्रमण की जानकारी मिलती है -
Answer: जियाउद्दीन बरनी द्वारा लिखित 'तारीख-ए-फीरोजशाही' और अमीर खुसरो की रचनाओं से रणथम्भौर पर अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण की विस्तृत जानकारी मिलती है।
115. ‘मारवाड़ रा परगना री विगत’ किसकी रचना है -
Answer: मुहणोत नैणसी ने 'मारवाड़ रा परगना री विगत' की रचना की, जिसमें मारवाड़ के विभिन्न परगनों की सामाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक जानकारी है। इसे 'मारवाड़ का गजेटियर' भी कहा जाता है।
116. मध्यकाल के दौरान किन बहियों में सरकारी भवनों के निर्माण सम्बन्धी जानकारी होती थी -
Answer: रियासती काल में 'कमठाना बही' में भवनों, किलों और अन्य निर्माण कार्यों से संबंधित खर्च और विवरण का लेखा-जोखा रखा जाता था।
117. बेड़वास गाँव की प्रशस्ति के समय मेवाड़ का शासक कौन था -
Answer: बेड़वास गाँव की प्रशस्ति मेवाड़ के महाराणा राज सिंह प्रथम के शासनकाल के दौरान लिखवाई गई थी।
118. निम्न लिखित युग्मों में से कौन सा युग्म सही नहीं है -अ. हिस्ट्री आॅफ फमीन्स इन राजस्थान: ओ. पी. कच्छवाहब. द लास्ट महाराणा ए बयोग्रफी आॅफ सवाई मानसिंह सेकण्ड आॅफ जयपुर: क्रिवी क्वेटीनस. आॅरिजन आॅफ राजपूत्स: जे. ए. असोपाद. हिस्ट्र आॅफ चाहमान्स: आर. बी. सिंह
Answer: दिए गए सभी विकल्प सही हैं। प्रत्येक पुस्तक और उसके लेखक का मिलान सही है, जो राजस्थान के इतिहास के विभिन्न पहलुओं से संबंधित हैं।
119. किस शिलालेख में चौहानों को ‘वत्सगोत्र’ ब्राह्मण कहा गया है -
Answer: 1170 ई. के बिजौलिया शिलालेख में चौहानों को वत्सगोत्र का ब्राह्मण बताया गया है, जो उनकी उत्पत्ति के ब्राह्मण वंशीय मत का प्रमुख आधार है।
120. घोसुण्डी अभिलेख .......... भाषा में लिखे गये थे -
Answer: घोसुण्डी अभिलेख की लिपि ब्राह्मी और भाषा संस्कृत है। यह राजस्थान में भागवत या वैष्णव धर्म का सबसे प्राचीन पुरालेखीय साक्ष्य है।