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राजस्थान में जिला प्रशासन

जिला प्रशासन
21. जी.वी.के. राव की अध्यक्षता में बनी ‘कार्ड समिति’ (1985) ने जिला कलेक्टर के संदर्भ में क्या सिफारिश की थी -
  • A. जिला कलेक्टर के पद को समाप्त करने की
  • B. कलेक्टर के विकास और नियामकीय कार्यों में विभाजन करने की
  • C. जिला कलेक्टर को केवल न्यायिक कार्यों तक सीमित करने की
  • D. जिला कलेक्टर को उपखण्ड अधिकारी के अधीन करने की
Answer: जी.वी.के. राव समिति ने सिफारिश की थी कि कलेक्टर के विकास कार्यों को उनके नियामक (कानून-व्यवस्था, राजस्व) कार्यों से अलग किया जाना चाहिए ताकि विकास कार्यों पर अधिक ध्यान दिया जा सके।
22. निम्नलिखित में से किसे जिले में प्रमुख जनगणना अधिकारी माना जाता है -
  • A. सम्भागीय आयुक्त
  • B. जिला कलक्टर
  • C. अतिरिक्त जिला कलक्टर
  • D. उपखण्ड अधिकारी
Answer: राष्ट्रीय जनगणना के दौरान, जिला कलेक्टर को उनके जिले के लिए प्रमुख जनगणना अधिकारी के रूप में नामित किया जाता है, जो जनगणना कार्यों के सुचारू संचालन के लिए जिम्मेदार होते हैं।
23. निम्नलिखित में से किसने जिला स्तर पर नियामक एवं विकास कार्यों में पृथक्करण की सिफारिश की -
  • A. दन्तवाला समिति
  • B. हनुमन्त राव समिति
  • C. प्रशासनिक सुधार आयोग
  • D. पी. वी. राजा मन्नार समिति
Answer: प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1966-70) ने यह महत्वपूर्ण सिफारिश की थी कि दक्षता में सुधार के लिए जिला कलेक्टर के विकास कार्यों को उनके नियामक (कानून और व्यवस्था) कार्यों से अलग किया जाना चाहिए।
24. राजस्थान में कुल कितनी जिला परिषद हैं -
  • A. 332
  • B. इनमें से कोई नहीं
  • C. 33
  • D. 112
Answer: प्रत्येक जिले के लिए एक जिला परिषद होती है। प्रश्न के संदर्भ में, जब राजस्थान में 33 जिले थे, तो 33 जिला परिषदें थीं। (नोट: 2023 के बाद जिलों की संख्या बढ़ गई है, जिससे जिला परिषदों की संख्या भी भविष्य में बढ़ेगी)।
25. जिला प्रशासन की क्षेत्रीय इकाई के रूप में ‘जिले’ का ऐतिहासिक विकास कब से माना जाता है -
  • A. मौर्यकाल के “विषय” से
  • B. गुप्तकाल के “मण्डल” से
  • C. मुगलकाल के “परगना” से
  • D. ब्रिटिश काल के “तहसील” से
Answer: जिले जैसी प्रशासनिक इकाई की अवधारणा का पता मौर्य साम्राज्य से लगाया जा सकता है, जहाँ प्रांतों को 'विषय' या 'आहार' नामक इकाइयों में विभाजित किया जाता था।
26. कथन (A)—– स्वतंत्र भारत में जिला कलेक्टर को स्वतंत्रता पूर्व के जिला कलेक्टर की अपेक्षा कम न्यायिक प्राधिकार प्राप्त है।कारण (R) — भारत के संविधान का अनुच्छेद 50 न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक करता है।
  • A. कूट : (1) A और R दोनों सही है और R, A का सही स्पष्टीकरण है
  • B. A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है
  • C. A सही है, परन्तु R गलत है
  • D. A गलत है, परन्तु R सही है।
Answer: कथन (A) सत्य है कि आजादी के बाद कलेक्टर की न्यायिक शक्तियां कम हो गईं। कारण (R) भी सत्य है कि अनुच्छेद 50 कार्यपालिका और न्यायपालिका के पृथक्करण का निर्देश देता है। यह कारण सीधे तौर पर कथन की व्याख्या करता है, क्योंकि इसी संवैधानिक निर्देश के कारण कलेक्टर (कार्यपालिका) से न्यायिक शक्तियां लेकर न्यायपालिका को दी गईं।
27. निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य पटवारी के दायित्वों में शामिल नहीं है -
  • A. भू-राजस्व संग्रहण और तहसील मुख्यालय में जमा कराना
  • B. गाँव में जन्म-मृत्यु के आँकड़ों का हिसाब रखना
  • C. उपखण्ड स्तर पर प्रशासनिक समन्वय स्थापित करना
  • D. भूमि सुधार जैसे चकबन्दी और हदबन्दी में सहयोग करना
Answer: पटवारी ग्राम स्तर पर कार्य करता है। उपखण्ड स्तर पर प्रशासनिक समन्वय स्थापित करना उपखण्ड अधिकारी (SDO) जैसे उच्च अधिकारियों का कार्य है।
28. साइमन कमीशन (1930) ने जिलाधीश की भूमिका के लिए क्या कहा था -
  • A. जिलाधीश प्रशासन की धुरी है।
  • B. जिलाधीश को अधिवक्ता, लेखाविद, सर्वेक्षणकर्ता और राजपत्र लेखक होना चाहिए।
  • C. जिलाधीश एक संस्थागत करिश्मा है।
  • D. जिलाधीश की तुलना एक कछुए से की जा सकती है।
Answer: साइमन कमीशन की रिपोर्ट में जिलाधीश के पद की बहुआयामी प्रकृति पर जोर दिया गया था, जिसमें कहा गया था कि इस भूमिका के लिए विविध कौशल की आवश्यकता होती है।
29. जिला प्रशासन का प्रमुख होता है-
  • A. जिलाधीश
  • B. सम्भाग अधिकारी
  • C. आयुक्त
  • D. उपायुक्त
Answer: जिलाधीश (या जिला कलेक्टर) जिले का मुख्य प्रशासनिक और राजस्व अधिकारी होता है और पूरे जिला प्रशासन का नेतृत्व करता है।
30. पटवारी के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है -
  • A. पटवारी का पद ब्रिटिश काल में प्रचलन में आया था।
  • B. पटवारी राजस्व प्रशासन की सबसे उच्च इकाई होता है।
  • C. पटवारी गाँव में जन्म-मृत्यु का लेखा-जोखा रखता है और सरकारी संपत्ति का संरक्षक होता है।
  • D. पटवारी की नियुक्ति जिला कलेक्टर द्वारा की जाती है।
Answer: पटवारी एक ग्राम-स्तरीय राजस्व अधिकारी है जो भूमि अभिलेखों को बनाए रखने के अलावा, जन्म और मृत्यु जैसे महत्वपूर्ण आँकड़ों का रिकॉर्ड भी रखता है और अपने क्षेत्र में सरकारी संपत्ति के संरक्षक के रूप में कार्य करता है।