राजस्थान की मध्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था
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राजस्थान की मध्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था
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QUESTION 11
गन्ना, कपास, अफीम व नील आदि नगदी फसलों पर प्रति बीघा की दर से राजस्व का निर्धारण तथा वसूली को क्या कहा जाता था -
Answer: जब्ती प्रणाली के तहत, नकदी फसलों पर उपज के हिस्से के बजाय प्रति बीघा एक निश्चित नकद राशि के रूप में भू-राजस्व का निर्धारण किया जाता था।
QUESTION 12
राजस्थान की सामन्त व्यवस्था का मूल आधार क्या था -
Answer: राजस्थान की सामंती व्यवस्था 'भाई-बंध' पर आधारित थी, जहाँ शासक को कुल का मुखिया माना जाता था और सामंत उसी कुल के सदस्य होते थे।
QUESTION 13
मदद-ए-माश मध्यकालीन राजपूत शासन में दी जाती थी -
Answer: यह एक प्रकार का भूमि अनुदान था जो शासक द्वारा विद्वानों, संतों और अन्य धार्मिक व्यक्तियों को उनके जीवन-यापन के लिए कर-मुक्त रूप में दिया जाता था।
QUESTION 14
“तिवारा कर” वसूला जाता था -
Answer: तिवारा कर (त्योहार कर) एक विशेष प्रकार का कर था जो राज्य द्वारा दिवाली और होली जैसे प्रमुख त्योहारों के अवसर पर प्रजा से वसूला जाता था।
QUESTION 15
राजा व जागीरदारों द्वारा काश्तकारों को पट्टे दे दिए जाते थे, इसका विवरण एक राजकीय रजिस्टर में रखा जाता था, इसे क्या कहते थे -
Answer: 'दाखला' उस आधिकारिक रजिस्टर को कहा जाता था जिसमें किसानों को दी गई भूमि के पट्टों का विस्तृत लेखा-जोखा रखा जाता था।
QUESTION 16
मध्यकालीन शासन व्यवस्था में मारवाड़ में बापीदार व गैर-बापीदार किसके प्रकार थे -
Answer: मारवाड़ में 'बापीदार' वे किसान थे जिनका भूमि पर वंशानुगत अधिकार होता था, जबकि 'गैर-बापीदार' वे किसान थे जिन्हें अस्थायी रूप से खेती करने का अधिकार मिलता था।
QUESTION 17
राजा द्वारा ब्राह्मणों, चारणों, भाटों, व संन्यासियों को दान में दी गई भूमि क्या कहलाती थी -
Answer: इस प्रकार की भूमि को 'माफी' भूमि कहा जाता था क्योंकि यह सभी प्रकार के राजकीय करों और शुल्कों से 'माफ़' होती थी।
QUESTION 18
बंटाई प्रथा में राजस्व का निर्धारण तीन प्रकार से होता था, उन तीनों प्रकारों के नाम बताइए -
Answer: बंटाई के तीन मुख्य तरीके थे: खेत बंटाई (खड़ी फसल का बंटवारा), लंक बंटाई (कटी फसल का गठ्ठरों में बंटवारा), और रास बंटाई (अनाज निकलने के बाद ढेर का बंटवारा)।
QUESTION 19
अधिकारियों के खाने-पीने के खर्च के लिए कौनसा कर लिया जाता था -
Answer: 'सिराणा' एक प्रकार का कर था जो गाँव के दौरे पर आए राजकीय अधिकारियों के भोजन और आवास के खर्च को पूरा करने के लिए ग्रामीणों से वसूला जाता था।
QUESTION 20
राजस्थान की एकमात्र कौनसी रियासत थी जहां उत्तराधिकारी शुल्क नहीं लिया जाता था -
Answer: जैसलमेर राजस्थान की एकमात्र ऐसी रियासत थी जहाँ नए जागीरदार के पदभार ग्रहण करने पर शासक द्वारा उत्तराधिकार शुल्क (जैसे तलवार बंधाई) लेने की परंपरा नहीं थी।