राजस्थान के रीति-रिवाज एवं प्रथाएँ
TOPICS ▾
राजस्थान का संगीत एवं लोकगीत
राजस्थान का साहित्य
राजस्थान की चित्र शैलियाँ
राजस्थान की प्रसिद्ध महिला व्यक्तित्व
राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ
राजस्थान की भाषा एवं बोलियाँ
राजस्थान की शब्दावली
राजस्थान की स्थापत्य कला
राजस्थान की हस्तकला
राजस्थान के आभूषण एवं वेशभूषा
राजस्थान के क्षेत्रीय कार्यक्रम
राजस्थान के त्यौहार
राजस्थान के नृत्य
राजस्थान के प्रमुख व्यक्तित्व
राजस्थान के प्रमुख संत एवं सम्प्रदाय
राजस्थान के प्रमुख स्थानों के उपनाम
राजस्थान के मेले
राजस्थान के रीति-रिवाज एवं प्रथाएँ
राजस्थान के लोक देवता व देवियाँ
राजस्थान के सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल
SORT BY ▾
101. मोकाण की रस्म का संबंध है -
Answer: 'मोकाण' मृत्यु से संबंधित एक रस्म है, जिसमें लोग शोक व्यक्त करने के लिए एकत्रित होते हैं।
102. ‘झिम्मी’ क्या है -
Answer: 'झिम्मी' एक विशेष प्रकार की ओढ़नी है जो विवाह में फेरों के समय दुल्हन को उसके मामा द्वारा दी जाती है।
103. स्त्री पुरूषों को दासों के रूप में रखने की परम्परा को क्या कहा जाता था -
Answer: स्त्री-पुरुषों को दास के रूप में रखने की परंपरा को 'गोला' कहा जाता था। इन दासों की संतानों को 'गोली' कहा जाता था।
104. किस संस्कार के पश्चात् ब्रह्मर्चाश्रम की शुरूआत होती है-
Answer: 'उपनयन' या 'यज्ञोपवीत' संस्कार के बाद बालक को शिक्षा ग्रहण करने के लिए गुरु के पास भेजा जाता था और यहीं से उसके ब्रह्मचर्य आश्रम की शुरुआत होती थी।
105. संथारा प्रथा किस धर्म से संबंधित है -
Answer: 'संथारा' या 'सल्लेखना' जैन धर्म से संबंधित एक प्रथा है, जिसमें व्यक्ति मोक्ष प्राप्ति के लिए स्वेच्छा से अन्न-जल त्याग देता है।
106. हिन्दु कानून का पोषक किस प्रथा को माना जाता है-
Answer: 'पगड़ी दस्तूर' की रस्म में पिता की मृत्यु के बाद उसके बड़े पुत्र को पगड़ी बांधी जाती है, जो उसे परिवार के मुखिया और उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित करती है। यह हिंदू उत्तराधिकार कानून का प्रतीक है।
107. विवाह के समय वर पक्ष द्वारा वधु पक्ष को कपड़े व गहने दिये जाते हैं उन्हें निम्न में से क्या कहते हैं - (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
Answer: विवाह के समय वर पक्ष की ओर से वधू के लिए जो कपड़े, गहने और अन्य सामान लाए जाते हैं, उसे 'बरी पड़ला' कहा जाता है।
108. तोरण मारना किसका प्रतिक है -
Answer: 'तोरण मारना' विजय का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा उस समय से जुड़ी है जब राजा-महाराजा युद्ध जीतकर और तोरण (विजय द्वार) को मारकर विवाह करते थे।
109. राज्य में सर्वप्रथम सती प्रथा पर रोक किस जिले द्वारा लगाई गई-
Answer: राजस्थान में सती प्रथा पर सबसे पहले रोक 1822 ई. में बूँदी रियासत द्वारा लगाई गई थी।
110. किस जाती में बच्चे के जनेऊ डालनें की प्रथा है-
Answer: 'जनेऊ' या यज्ञोपवीत संस्कार मुख्य रूप से ब्राह्मण जाति में किया जाता है, हालांकि परंपरागत रूप से यह क्षत्रिय और वैश्य वर्णों में भी होता था।
111. राजस्थान में जलवा पूूजन किया जाता है -
Answer: 'जलवा पूजन' या कुआं पूजन बच्चे के जन्म के कुछ दिनों बाद किया जाता है, जब माँ और शिशु पहली बार घर से बाहर निकलते हैं।
112. मृत्यु उत्सव के लिए राजस्थान में निम्न में से कौनसा एक नाम है-
Answer: 'मौसर' राजस्थान में मृत्यु भोज के लिए प्रचलित एक नाम है।
113. राजस्थान के रीति – रिवाजों में ‘आंणौ’ क्या है -
Answer: 'आंणौ' या गौना वह रिवाज है जिसमें विवाह के बाद दुल्हन को दूसरी बार (या पहली बार स्थाई रूप से) उसके ससुराल भेजा जाता है।
114. सती प्रथा का अन्य नाम है -
Answer: सती प्रथा को 'सहमरण', 'सहगमन' और 'अन्वारोहण' इन सभी नामों से जाना जाता था, क्योंकि इसमें पत्नी पति के साथ ही मृत्यु को प्राप्त होती थी।
115. ‘सहगमन’ प्रथा का संबंध था -
Answer: 'सहगमन' का अर्थ है 'साथ जाना'। यह प्रथा सती प्रथा से संबंधित है, जिसमें विधवा अपने मृत पति के साथ चिता पर बैठ जाती थी।
116. राजस्थान की संस्कृति में ‘मुगधणा’ क्या है-
Answer: 'मुगधणा' या 'मुग्धणा' विवाह की एक रस्म है जिसमें गणेश (विनायक) स्थापना के बाद भोजन पकाने के लिए लकड़ियां लाई जाती हैं।
117. सीरावन किसे कहते हैं -
Answer: 'सीरावन' या 'कलेवा' राजस्थान में किसानों द्वारा सुबह किए जाने वाले नाश्ते या भोजन को कहा जाता है।
118. लार्ड डलहौजी ने स्त्रियों को विधवा विवाह से मुक्ति प्रदान करने हेतु 'विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' किस वर्ष बनाया
Answer: ईश्वर चंद्र विद्यासागर के प्रयासों से, लॉर्ड डलहौजी के कार्यकाल में मसौदा तैयार हुआ और लॉर्ड कैनिंग के समय में 1856 में 'विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' पारित किया गया।
119. राजस्थान के रीति-रिवाजों में ‘मौसर’ किसे कहा जाता है -
Answer: 'मौसर' राजस्थान में मृत्यु के बाद दिए जाने वाले भोज को कहा जाता है।
120. जागीरदारों में पहले लोग अपनी शादी में दहेज के साथ में कुछ कुंआरी कन्याएं भी देते थे इसे किस नाम से पुकार जाता था -
Answer: इस प्रथा को 'डावड़ी' या 'डावरिया प्रथा' कहा जाता था, जिसमें राजा-महाराजा अपनी बेटी के विवाह में दहेज के साथ कुछ कुंवारी कन्याएं भी देते थे।