राजस्थान का संगीत एवं लोकगीत
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61. निम्न में से कौनसा सुषिर वाद्य नहीं है -
Answer: रवाज़ एक तत् (तार वाला) वाद्य है, जबकि अलगोज़ा, मशक और नड़ तीनों सुषिर (फूंक से बजने वाले) वाद्य हैं।
62. महाराजा सवाई प्रताप सिंह के आश्रय में राधा गोविन्द संगीत सार के निर्माण का श्रेय किसे है -
Answer: सवाई प्रताप सिंह के दरबारी संगीतज्ञ देवर्षि भट्ट ब्रजपाल ने 'राधा गोविंद संगीत सार' नामक ग्रंथ की रचना की थी।
63. राजस्थान के पंडित विश्व मोहन भट्ट का संबंध किस वाद्य यत्र से स्थापित किया जा सकता है -
Answer: पंडित विश्व मोहन भट्ट ने गिटार में संशोधन करके एक नया वाद्य यंत्र बनाया, जिसे 'मोहन वीणा' के नाम से जाना जाता है।
64. साकर खान को 2012 में किस लोक वाद्य में प्रवीणता के लिए पद्यश्री से सम्मानित किया गया -
Answer: साकर खान मांगणियार को कामायचा वादन में उनकी असाधारण प्रवीणता के लिए 2012 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
65. फड़ बांचते समय किस वाद्य यंत्र का प्रयोग किया जाता है -
Answer: भोपे पाबूजी जैसे लोक देवताओं की फड़ का वाचन करते समय मुख्य रूप से रावणहत्था वाद्य यंत्र का प्रयोग करते हैं।
66. मांड गायन में असाधारण योगदान के लिए निम्नलिखित में से किसे पद्मश्री से सम्मानित किया गया -
Answer: अल्लाह जिलाई बाई को मांड गायन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए 1982 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
67. आदिवासी भीलों और गरासियों का प्रमुख वाद्य यन्त्र है -
Answer: मान्दल मिट्टी से बना एक प्राचीन वाद्य यंत्र है, जो विशेष रूप से भील और गरासिया जनजातियों द्वारा गवरी नृत्य जैसे अवसरों पर उपयोग किया जाता है।
68. निम्नलिखित में से कौन सा तंत्र वाद्य नहीं है -
Answer: अलगोजा एक सुषिर (फूंक से बजने वाला) वाद्य है। रवाज, जंतर और कामायचा तीनों तंत्र या तत् (तार वाले) वाद्य हैं।
69. लोक नाट्यों का मेरू नाठ्य कहा जाता है-
Answer: गवरी, जो भीलों द्वारा किया जाने वाला एक धार्मिक लोकनाट्य है, को इसकी प्राचीनता और सामाजिक महत्व के कारण 'लोक नाट्यों का मेरु नाट्य' कहा जाता है।
70. राजस्थानी लोक साहित्य री दीठ सूं ‘हरजस’ कांई है -
Answer: हरजस सगुण भक्ति से परिपूर्ण लोकगीत हैं, जिनमें राम और कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया जाता है।
71. राजस्थान का एकमात्र ऐसा लोकवाद्य जिसकी डोटी में तनाव के लिये पखावज की तरह लकड़ी के गुटके डाले जाते हैं -
Answer: रावलों की मादल में चमड़े की डोरी में तनाव बनाए रखने के लिए पखावज की तरह लकड़ी के गुटकों का उपयोग किया जाता है।
72. रूपायन संस्थान बोरून्दा, जोधपुर की स्थापना कब हुई -
Answer: राजस्थानी लोक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए कोमल कोठारी द्वारा रूपायन संस्थान की स्थापना 1960 में बोरून्दा (जोधपुर) में की गई थी।
73. निम्नलिखित में से किस संगीत का सम्बन्ध राजस्थान से नहीं है -
Answer: बाउल संगीत पश्चिम बंगाल की एक लोक संगीत परंपरा है, जबकि मांगणियार, भोपा और लंगा राजस्थान की प्रसिद्ध संगीत जातियां हैं।
74. चारबैत, जो राजस्थान की प्रचलित लोक गायन शैली है, कहां प्रसिद्ध है -
Answer: चारबैत मूल रूप से अफगानिस्तान की एक शैली है जो राजस्थान में टोंक जिले में बहुत लोकप्रिय है।
75. सुम्मेलित कीजिए -
Answer: सही मिलान है: इकतारा - तत् वाद्य (2), अलगोजा - सुषिर वाद्य (3), झांझ - घन वाद्य (1), मादल - अवनद्ध वाद्य (4)।
76. शहनाई वाद्ययंत्रों के किस परिवार से संबंधित है -
Answer: शहनाई को फूंक मारकर बजाया जाता है, इसलिए यह सुषिर वाद्य यंत्रों के परिवार से संबंधित है।
77. निम्नलिखित में से कौन सा वाद्य यंत्र मिट्टी के मटके के संकरे मुँह पर कांसे की प्लेट ढंककर दो डंडियों से बजाया जाता है और सर्प दंश के इलाज के दौरान पूर्वी राजस्थान में प्रयोग होता है -
Answer: भरनी एक विशेष वाद्य यंत्र है जो मिट्टी के मटके से बनता है और इसका उपयोग सर्प दंश के इलाज के लिए किया जाता है।
78. निम्नलिखित में से कौनसा तत् लोक वाद्य यन्त्र नहीं हैं -
Answer: मादल एक अवनद्ध (चमड़े से मढ़ा हुआ) वाद्य है, जबकि रावणहत्था, रवज और भपंग तत् (तार वाले) वाद्य हैं।
79. किस वाद्य यन्त्र की आकृति चिलम के आकार जैसी होती है -
Answer: शहनाई का निचला हिस्सा चौड़ा होता है जो इसे चिलम जैसा आकार देता है।
80. किसे ‘वागड़ की मीरा’ भी कहा जाता है -
Answer: डूंगरपुर की गवरी बाई, भगवान कृष्ण की एक महान भक्त थीं, और उनकी भक्ति के कारण उन्हें 'वागड़ की मीरा' कहा जाता है।