राजस्थान का संगीत एवं लोकगीत
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QUESTION 71
लोक नाट्यों का मेरू नाठ्य कहा जाता है-
Answer: गवरी, जो भीलों द्वारा किया जाने वाला एक धार्मिक लोकनाट्य है, को इसकी प्राचीनता और सामाजिक महत्व के कारण 'लोक नाट्यों का मेरु नाट्य' कहा जाता है।
QUESTION 72
राजस्थानी लोक साहित्य री दीठ सूं ‘हरजस’ कांई है -
Answer: हरजस सगुण भक्ति से परिपूर्ण लोकगीत हैं, जिनमें राम और कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया जाता है।
QUESTION 73
राजस्थान का एकमात्र ऐसा लोकवाद्य जिसकी डोटी में तनाव के लिये पखावज की तरह लकड़ी के गुटके डाले जाते हैं -
Answer: रावलों की मादल में चमड़े की डोरी में तनाव बनाए रखने के लिए पखावज की तरह लकड़ी के गुटकों का उपयोग किया जाता है।
QUESTION 74
रूपायन संस्थान बोरून्दा, जोधपुर की स्थापना कब हुई -
Answer: राजस्थानी लोक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए कोमल कोठारी द्वारा रूपायन संस्थान की स्थापना 1960 में बोरून्दा (जोधपुर) में की गई थी।
QUESTION 75
निम्नलिखित में से किस संगीत का सम्बन्ध राजस्थान से नहीं है -
Answer: बाउल संगीत पश्चिम बंगाल की एक लोक संगीत परंपरा है, जबकि मांगणियार, भोपा और लंगा राजस्थान की प्रसिद्ध संगीत जातियां हैं।
QUESTION 76
चारबैत, जो राजस्थान की प्रचलित लोक गायन शैली है, कहां प्रसिद्ध है -
Answer: चारबैत मूल रूप से अफगानिस्तान की एक शैली है जो राजस्थान में टोंक जिले में बहुत लोकप्रिय है।
QUESTION 77
सुम्मेलित कीजिए -
Answer: सही मिलान है: इकतारा - तत् वाद्य (2), अलगोजा - सुषिर वाद्य (3), झांझ - घन वाद्य (1), मादल - अवनद्ध वाद्य (4)।
QUESTION 78
शहनाई वाद्ययंत्रों के किस परिवार से संबंधित है -
Answer: शहनाई को फूंक मारकर बजाया जाता है, इसलिए यह सुषिर वाद्य यंत्रों के परिवार से संबंधित है।
QUESTION 79
निम्नलिखित में से कौन सा वाद्य यंत्र मिट्टी के मटके के संकरे मुँह पर कांसे की प्लेट ढंककर दो डंडियों से बजाया जाता है और सर्प दंश के इलाज के दौरान पूर्वी राजस्थान में प्रयोग होता है -
Answer: भरनी एक विशेष वाद्य यंत्र है जो मिट्टी के मटके से बनता है और इसका उपयोग सर्प दंश के इलाज के लिए किया जाता है।
QUESTION 80
निम्नलिखित में से कौनसा तत् लोक वाद्य यन्त्र नहीं हैं -
Answer: मादल एक अवनद्ध (चमड़े से मढ़ा हुआ) वाद्य है, जबकि रावणहत्था, रवज और भपंग तत् (तार वाले) वाद्य हैं।