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राज्य के नीति निर्देशक तत्व

राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों (DPSP) का महत्व और संविधान में उनके प्रावधानों को जानें। गांधीवादी, समाजवादी सिद्धांतों को समझें।

 

राज्य के नीति निर्देशक तत्व
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अनुसूचित और जनजाति क्षेत्र / पिछड़े वर्गों के संबंध में विशेष प्रावधान आपात उपबन्ध आयोग व परिषदें उच्च न्यायालय उपराष्ट्रपति केंद्र-राज्य संबंध जम्मू-कश्मीर के संबंध में विशेष प्रावधान​ दल-बदल विरोधी कानून नागरिकता निर्वाचन आयोग पंचायती राज व्यवस्था पदाधिकारियों का अनुक्रम प्रधानमंत्री प्रमुख पदाधिकारीगण/उप-प्रधानमंत्री प्रमुख पदाधिकारीगण/नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक प्रमुख पदाधिकारीगण/महान्यायवादी प्रमुख पदाधिकारीगण/लोकसभा अध्यक्ष भारत का संवैधानिक इतिहास भारतीय राजनीति में दबाव समूह भारतीय संसद मुख्यमंत्री मूल अधिकार मूल कर्तव्य राजनीतिक दल राजभाषा राज्य के नीति निर्देशक तत्व राज्य सभा राज्यपाल राष्ट्रपति लोकसभा विधान परिषद विधानसभा संघ और उसके राज्य क्षेत्र संघ राज्य क्षेत्रों का प्रशासन संघीय मंत्रिपरिषद संविधान की अनुसूचियां संविधान की प्रस्तावना संविधान की विशेषताएं संविधान के अनुच्छेद संविधान के भाग संविधान के स्त्रोत संविधान संशोधन संविधान सभा संसदीय समितियां सर्वोच्च न्यायालय
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1. संविधान में राज्य के नीति निर्देशक तत्वों को शामिल करने के पीछे क्या उद्देश्य है ?
  • A.राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना
  • B.सामजिक लोकतंत्र की स्थापना
  • C.सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना
  • D.गांधीवादी आदर्शों के अनुरूप लोकतंत्र की स्थापना
Answer: राज्य के नीति निर्देशक तत्वों का मुख्य उद्देश्य भारत में एक 'कल्याणकारी राज्य' की स्थापना करना है, जो सामाजिक और आर्थिक न्याय पर आधारित हो। ये तत्व सरकार को नीतियां बनाते समय इन सिद्धांतों को ध्यान में रखने का निर्देश देते हैं ताकि सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र स्थापित हो सके।
2. निम्न कथनों पर विचार कीजिये 1. भारत के संविधान में पुरुषों और महिलाओं द्वारा समान कार्य के लिए समान वेतन देने को बढ़ावा देने के लिए कोई उपबन्ध नहीं हैं 2. भारत के संविधान पिछड़े वर्गों को परिभाषित नहीं किया गया हैं l उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही हैं
  • A.केवल 1
  • B.केवल 2
  • C.1 और 2 दोनों
  • D.न तो 1 और न ही 2
Answer: कथन 1 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 39(घ) में 'समान कार्य के लिए समान वेतन' का प्रावधान है। कथन 2 सही है क्योंकि संविधान में 'पिछड़े वर्गों' की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है; इसे परिभाषित करने का अधिकार सरकार और आयोगों पर छोड़ा गया है।
3. शराबबंदी संविधान की किस धारा में निर्देशित हैं
  • A.धारा 47
  • B.धारा 37
  • C.धारा 50
  • D.धारा 48
Answer: संविधान का अनुच्छेद 47 (धारा 47) राज्य को यह निर्देश देता है कि वह लोगों के पोषण स्तर और जीवन स्तर को ऊंचा करने तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करने का प्रयास करेगा और विशेष रूप से, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नशीले पेय और दवाओं के सेवन पर प्रतिबंध लगाएगा।
4. इनमें से कौन राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों में सम्मिलित नहीं है ?
  • A.मद्य निषेध
  • B.काम का अधिकार
  • C.समान कार्य हेतु समान वेतन
  • D.सूचना का अधिकार
Answer: मद्य निषेध (अनुच्छेद 47), काम का अधिकार (अनुच्छेद 41), और समान कार्य हेतु समान वेतन (अनुच्छेद 39) नीति निर्देशक तत्वों का हिस्सा हैं। 'सूचना का अधिकार' एक मौलिक अधिकार है जिसे अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मान्यता दी गई है।
5. किस संवैधानिक संशोधन अधिनियम ने राज्य के नीति-निर्देशक तत्त्वों को मौलिक अधिकारों की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली बनाया ?
  • A.42वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1976
  • B.43वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1977
  • C.44वां संवैधानिक अधिनियम, 1978
  • D.45वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1980
Answer: 42वें संशोधन, 1976 ने यह प्रावधान जोड़ा कि यदि कोई कानून अनुच्छेद 39(b) और 39(c) में दिए गए नीति-निर्देशक तत्वों को लागू करने के लिए बनाया जाता है, तो उसे इस आधार पर अमान्य नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या 19 द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
6. किसी नीति निर्देशक सिद्धांत को प्राय: समाजवादी माना जाता है ?
  • A.ग्राम पंचायतों की स्थापना
  • B.गोवध पर प्रतिबन्ध
  • C.अंतर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा को प्रोत्साहन
  • D.आय की असमानताओं को कम से कम करना
Answer: ग्राम पंचायतों की स्थापना (अनुच्छेद 40) को गांधीवादी सिद्धांत माना जाता है, जो स्थानीय स्वशासन और सत्ता के विकेंद्रीकरण पर जोर देता है। यह गांधीजी के 'ग्राम स्वराज्य' के दर्शन के अनुरूप है।
7. निम्न में से कौन सा राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में शामिल हैं 1. मानव के दुर्व्यापार और बलात श्रम का प्रतिषेध 2. मादक पेयों और स्वास्थ्य के लिए हानिकर औषधियों के औषधीय प्रयोजनों से भिन्न उपयोग का प्रतिषेध कूट
  • A.केवल 1
  • B.केवल 2
  • C.1 और 2 दोनों
  • D.न तो 1 और न ही 2
Answer: मानव के दुर्व्यापार और बलात श्रम का प्रतिषेध एक मौलिक अधिकार है (अनुच्छेद 23)। मादक पेयों पर प्रतिषेध राज्य के नीति निर्देशक तत्व (अनुच्छेद 47) का हिस्सा है। इसलिए केवल कथन 2 सही है।
8. निम्नलिखित में से कौन - सा एक संविधान के 42वें संशोधन द्वारा नीति निदेशक तत्त्वों में नहीं जोड़ा गया ?
  • A.शोषण से युवाओं तथा बच्चों की सुरक्षा
  • B.समान न्याय तथा नि:शुल्क कानूनी सलाह
  • C.सभी नागरिकों के लिए समान आचार संहिता
  • D.उद्योगों के प्रबन्धन में श्रमिकों की भागीदारी
Answer: 'सभी नागरिकों के लिए समान आचार संहिता' (अनुच्छेद 44) मूल संविधान का ही हिस्सा था। 42वें संशोधन द्वारा बच्चों की सुरक्षा (अनु. 39), समान न्याय (अनु. 39A), और उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी (अनु. 43A) को जोड़ा गया था।
9. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद द्वारा निम्न दुर्बल वर्गों को शिक्षा सम्बन्धी सुरक्षा प्रदान की गई है ?
  • A.अनुच्छेद 45
  • B.अनुच्छेद 46
  • C.अनुच्च्चेद 47
  • D.अनुच्छेद 48
Answer: अनुच्छेद 46 राज्य को यह निर्देश देता है कि वह अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देगा और उन्हें सामाजिक अन्याय और सभी प्रकार के शोषण से बचाएगा।
10. संविधान का वह कौन - सा भाग है जो संविधान के निर्माताओं के मस्तिष्क और उद्देश्यों को प्रतिबिंबित करता है ?
  • A.मूल अधिकार
  • B.संविधान की प्रस्तावना
  • C.राज्य के नीति निर्देशक तत्व
  • D.भारतीय नागरिकता
Answer: राज्य के नीति निर्देशक तत्व उन आदर्शों और लक्ष्यों को दर्शाते हैं जिन्हें संविधान निर्माता भविष्य के भारत में प्राप्त करना चाहते थे। ये तत्व एक कल्याणकारी, सामाजिक और आर्थिक रूप से न्यायपूर्ण समाज की स्थापना के उनके दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करते हैं।