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भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन: उदारवादी चरण

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उदारवादी/नरमपंथी चरण पर आधारित MCQs हल करें। इस काल के प्रमुख नेताओं और उनकी मांगों के बारे में जानें।

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन: उदारवादी चरण
QUESTION 111
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ इंडियन एसोसिएशन का विलय कब हुआ था ?
  • A 1885 ई०
  • B 1886 ई०
  • C 1892 ई०
  • D 1895 ई०
Answer: 1885 में अपने स्वयं के राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन के बाद, सुरेन्द्रनाथ बनर्जी के नेतृत्व वाला इंडियन एसोसिएशन 1886 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में विलीन हो गया।
QUESTION 112
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए- 1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन कलकत्ता में हुआ 2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दूसरा अधिवेशन दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में हुआ 3. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग, दोनों ने लखनऊ में 1916 में अधिवेशन किया तथा लखनऊ समझौता संपन्न हुआ उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सही है/हैं?
  • A 1 और 2
  • B केवल 2
  • C 2 और 3
  • D केवल 3
Answer: पहला कथन गलत है (पहला अधिवेशन बंबई में हुआ था)। दूसरा और तीसरा कथन सही हैं।
QUESTION 113
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के 1905-1917 की अवधि को कहा जाता है—
  • A उदारवादी चरण
  • B उग्रवादी चरण
  • C गांधी युग
  • D इनमें से कोई नहीं
Answer: यह अवधि बंगाल विभाजन के बाद शुरू हुई और इसमें बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल जैसे उग्रवादी (गरमपंथी) नेताओं का प्रभुत्व था।
QUESTION 114
निम्नलिखित में किसने एक सार्वजनिक भाषण में राष्ट्रीय कांग्रेस पर हमला किया तथा उसे 'जनता के एक बहुत सूक्ष्म भाग' (Microscopic Minority) का प्रतिनिधि बताकर उसकी हँसी उड़ाई?
  • A डफरिन
  • B कर्जन
  • C नार्थब्रुक
  • D लिटन
Answer: वायसराय लॉर्ड डफरिन ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को महत्वहीन बताते हुए उसे 'सूक्ष्म अल्पसंख्यक' कहकर उसका उपहास किया था।
QUESTION 115
निम्नलिखित में से किसे भारतीय 'अशांति के जनक' के रूप में जाना जाता है?
  • A ए. ओ. ह्यूम
  • B दादाभाई नौरोजी
  • C बाल गंगाधर तिलक
  • D महात्मा गांधी
Answer: ब्रिटिश पत्रकार वेलेंटाइन शिरोल ने बाल गंगाधर तिलक को उनके उग्र राष्ट्रवादी विचारों और ब्रिटिश शासन के खिलाफ जनता को संगठित करने के कारण 'भारतीय अशांति का जनक' कहा था।
QUESTION 116
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन लगभग आखिरी समय पर पूना से बंबई स्थानांतरित किया गया, क्योंकि-
  • A बंबई प्रेसीडेंसी संघ के नेतागण कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन के पूना में संपन्न होने के विरोधी थे।
  • B बंबई के गवर्नर कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष बनने के लिए ए. ओ. ह्यूम के सुझाव से सहमत थे।
  • C प्रेसीडेंसी की राजधानी होने के कारण बंबई अधिवेशन में अधिक ध्यान आकर्षित करने में सहायक होता।
  • D पूना में हैजा फैलने के कारण संयोजक कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन का स्थान पूना से बंबई बदलने पर विवश हुए थे।
Answer: कांग्रेस का पहला अधिवेशन मूल रूप से पूना में होने वाला था, लेकिन शहर में हैजा फैलने के कारण इसे अंतिम समय में बंबई स्थानांतरित करना पड़ा।
QUESTION 117
निम्नलिखित भारतीय नेताओं में से कौन एक ब्रिटिश द्वारा इंडियन सिविल सर्विस से बर्खास्त किया गया था?
  • A सत्येन्द्र नाथ टैगोर
  • B सुरेन्द्रनाथ बनर्जी
  • C आर. सी. दत्त
  • D सुभाष चन्द्र बोस
Answer: सुरेन्द्रनाथ बनर्जी को 1874 में एक मामूली न्यायिक त्रुटि के आधार पर भारतीय सिविल सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था, जिसे व्यापक रूप से एक भेदभावपूर्ण कार्रवाई माना गया।
QUESTION 118
उदारवादियों की कार्यपद्धति के साधन थे
  • A प्रार्थना, याचना व विरोध
  • B हिंसा
  • C जन आंदोलन
  • D इनमें से कोई नहीं
Answer: उदारवादी (नरमपंथी) नेता ब्रिटिश सरकार के समक्ष अपनी मांगों को रखने के लिए संवैधानिक तरीकों जैसे प्रार्थना, याचिका और शांतिपूर्ण विरोध का उपयोग करते थे।
QUESTION 119
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए- दादा भाई नौरोजी 1. तीन बार राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए 2. 'पावर्टी एण्ड अनब्रिटिश रूल इन इंडिया' (Poverty and Un-British Rule in India) नामक पुस्तक की रचना की। 3. 'नेशनल सोशल कांफ्रेंस' की स्थापना की इन कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
  • A केवल 1
  • B 1 और 2
  • C 2 और 3
  • D केवल 3
Answer: दादाभाई नौरोजी तीन बार कांग्रेस अध्यक्ष बने और उन्होंने 'पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' लिखी। नेशनल सोशल कॉन्फ्रेंस की स्थापना एम. जी. रानाडे और रघुनाथ राव ने की थी।
QUESTION 120
'पंजाब केसरी' का खिताब किसको दिया गया था ?
  • A रणजीत सिंह
  • B भगत सिंह
  • C सरदार बलदेव सिंह
  • D लाला लाजपत राय
Answer: लाला लाजपत राय को उनकी निडरता और पंजाब में राष्ट्रवादी आंदोलन के नेतृत्व के लिए 'पंजाब केसरी' (पंजाब का शेर) की उपाधि दी गई थी।