गुर्जर प्रतिहार वंश
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1. 750-1000 ईस्वी के दौरान राजस्थान और अधिकांश उत्तरी भारत पर निम्नलिखित में से किसने शासन किया था -
Answer: 8वीं से 10वीं शताब्दी तक, गुर्जर-प्रतिहार वंश ने राजस्थान और उत्तरी भारत के एक बड़े हिस्से पर शासन किया और विदेशी आक्रमणों से देश की रक्षा की।
2. प्रतिहारों के अभिलेखों में, राज्याधिकारियों को कहा जाता था-
Answer: प्रतिहार वंश के शिलालेखों और अभिलेखों में, सरकारी अधिकारियों या राज्याधिकारियों के लिए 'राजपुरुष' शब्द का प्रयोग किया गया है।
3. गुर्जर प्रतिहारों की राजधानी किस स्थान पर थी, जो जालौर में भीनमाल का एक पुराना नाम भी था -
Answer: भीनमाल का प्राचीन नाम 'श्रीमाल' था, जो गुर्जर-प्रतिहारों की प्रारंभिक और महत्वपूर्ण राजधानियों में से एक था।
4. निम्न में से किन अभिलेखों में प्र्रतिहारों को गुर्जर कहा गया है -अ. नीलगुण्डब. देवलीस. राधनपुरद. कराड़कूट -
Answer: नीलगुण्ड, देवली, राधनपुर और कराड़, इन सभी अभिलेखों में प्रतिहारों के लिए 'गुर्जर' शब्द का प्रयोग हुआ है, जो उनके गुर्जर प्रदेश से संबंध को दर्शाता है।
5. अरब यात्री सुलेमान ने किस प्रतिहार राजा के शासनकाल में भारत की यात्रा की -
Answer: अरब यात्री सुलेमान, प्रतिहार सम्राट मिहिरभोज (भोज प्रथम) के शासनकाल में भारत आया था और उसने उनकी शक्ति और साम्राज्य की बहुत प्रशंसा की।
6. ‘परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर’ की उपाधि धारण की -
Answer: नागभट्ट द्वितीय ने कन्नौज के शासक चक्रायुध को हराकर और कन्नौज पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष्य में यह भव्य उपाधि धारण की थी।
7. किस प्रतिहार शासक ने ‘आदिवराह’ की उपाधि धारण की -
Answer: प्रतिहार सम्राट मिहिरभोज विष्णु भगवान के उपासक थे, इसलिए उन्होंने 'आदिवराह' की उपाधि धारण की। यह उपाधि उनके सिक्कों पर भी मिलती है।
8. गुर्जर प्रतिहार वंश का प्रथम, योग्य व प्रतापी शासक था -
Answer: नागभट्ट प्रथम ने भीनमाल शाखा की स्थापना की और अरबों के आक्रमण को सफलतापूर्वक रोका, जिससे वह वंश का पहला शक्तिशाली शासक बना।
9. निम्न में से वह शासक जिसने अरब आक्रमणकारियों को अपने राज्य में बढ़ने नहीं दिया और यह शासक अरबों का शत्रु कहा गया -
Answer: नागभट्ट प्रथम ने सिंध की ओर से होने वाले अरब आक्रमणों को सफलतापूर्वक विफल किया, जिस कारण उन्हें 'म्लेच्छों का नाशक' भी कहा जाता है।
10. प्रतिहार शासक _____ के शासन काल में जैन ग्रन्थ हरिवंशपुराण एवं कुवलयमाला की रचना हुयी -
Answer: प्रतिहार शासक वत्सराज के दरबार में, उद्योतन सूरी ने 'कुवलयमाला' और जिनसेन सूरी ने 'हरिवंश पुराण' नामक महत्वपूर्ण जैन ग्रंथों की रचना की।
11. मण्डोर के प्रतिहारों के सम्बन्ध में निम्न में से कौन सा कथन सही नहीं है -
Answer: यह कथन गलत है क्योंकि ऐसा कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता। अन्य सभी कथन मंडोर के प्रतिहारों के बारे में सही हैं।
12. मण्डोर - प्रतिहार वंश के किस शासक से वंशावली प्रारम्भ होती है -
Answer: मंडोर के प्रतिहार वंश का संस्थापक हरिश्चंद्र था, लेकिन उनकी क्षत्रिय पत्नी भद्रा से उत्पन्न पुत्र रज्जिल से ही इस वंश की व्यवस्थित वंशावली शुरू होती है।
13. गुर्जरों को किस शासक ने प्राजित किया -
Answer: वर्धन वंश के शासक प्रभाकरवर्धन ने अपने साम्राज्य का विस्तार करते हुए गुर्जरों सहित कई अन्य शक्तियों को पराजित किया था।
14. आदिवराह की उपाधि जिस राजपूत शासक ने धारण की वह है-
Answer: यह प्रतिहार सम्राट मिहिरभोज की एक प्रसिद्ध उपाधि थी, जो उनके सिक्कों पर भी अंकित मिलती है और उनके वैष्णव धर्म के अनुयायी होने का प्रमाण है।
15. प्रतिहारों की कौनसी शाखा सर्वाधिक पुरातन मानी जाती है -
Answer: प्रतिहारों की सबसे पहली और सबसे पुरानी शाखा मंडोर (जोधपुर) थी, जिसकी स्थापना हरिश्चंद्र ने लगभग छठी शताब्दी में की थी।
16. वह गुर्जर प्रतिहार शासक जिसने कन्नौज विजय के उपलक्ष्य में ‘परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर’ की उपाधि धारण की थी-
Answer: नागभट्ट द्वितीय ने कन्नौज पर विजय प्राप्त कर उसे अपनी राजधानी बनाया और इस विजय के उपलक्ष्य में 'परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर' की उपाधि धारण की।
17. प्रतिहारा की 26 शाखाओं में से, सबसे प्राचीन शाखा है :
Answer: मुहणौत नैणसी द्वारा वर्णित 26 शाखाओं में से मंडोर की शाखा को सबसे प्राचीन माना जाता है, जिसकी स्थापना हरिश्चंद्र ने की थी।
18. मुहणौत नैणसी ने गुर्जर-प्रतिहारों की कितनी शाखाओं का वर्णन किया है-
Answer: प्रसिद्ध इतिहासकार मुहणौत नैणसी ने अपनी ख्यात में गुर्जर-प्रतिहार वंश की कुल 26 शाखाओं का उल्लेख किया है।
19. नागभट्ट प्रथम के शासनकाल के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सी बात सही नहीं है -
Answer: यह कथन गलत है क्योंकि कन्नौज को राजधानी नागभट्ट द्वितीय ने बनाया था, नागभट्ट प्रथम ने नहीं।
20. किस प्रतिहार राजा ने ‘आदिवराह’ की उपाधि ग्रहण की -
Answer: सम्राट मिहिरभोज ने 'आदिवराह' की उपाधि धारण की थी। वे विष्णु के भक्त थे और उनके सिक्कों पर भी यह उपाधि अंकित है।