राजस्थान की मध्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था
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1. राजपूत सेना में पैदल सैनिक अधिक होते थे, इनके दल को क्या कहा जाता था -
Answer: मध्यकालीन राजपूत सेना में पैदल सैनिकों के दल को 'प्यादे' कहा जाता था, जो फारसी शब्द 'प्यादा' से लिया गया है।
2. निम्नलिखित में से असंगत कथन की पहचान करें।
Answer: यह कथन असत्य है क्योंकि 'बदोले री लाग' जागीरदार द्वारा दी जाने वाली सहायता नहीं, बल्कि किसानों से वसूला जाने वाला एक प्रकार का कर था।
3. ‘जागीर’ शब्द किस भाषा से लिया गया है -
Answer: 'जागीर' शब्द फारसी भाषा से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है 'भूमि धारण करना'। यह मुगल काल में प्रशासनिक शब्दावली का हिस्सा बना।
4. परगने में कोई बड़ा अपराध या संगीन डकैती होने पर फौजदार और कभी-कभी ठाकुर स्वयं सवारों के साथ डाकुओं के विरूद्ध अभियान पर जाते थे। इस अभियान को मारवाड़ में क्या कहते थे -
Answer: मारवाड़ में, जब कोई अधिकारी या ठाकुर अपराधियों का पीछा करने के लिए अपने क्षेत्र से बाहर सैन्य अभियान पर जाता था, तो इस कार्रवाई को 'बाहर चढ़ना' कहा जाता था।
5. राजवी, सरदार, मुत्सदी और गनायत किस राज्य में सामन्तों की श्रेणियां थी -
Answer: यह सामंतों का वर्गीकरण मारवाड़ (जोधपुर) रियासत में प्रचलित था, जहाँ राजवी राजा के निकट संबंधी, सरदार प्रमुख ठाकुर और मुत्सदी प्रशासनिक अधिकारी होते थे।
6. बीकानेर शासक गंगासिंह ने ऊँटों की सेना तैयार कर उसे क्या नाम दिया था, यह सेना दल अपने राज्य से बाहर अंग्रेजों की सहायतार्थ जाता रहता था -
Answer: महाराजा गंगासिंह ने ऊंटों की एक प्रसिद्ध सैन्य टुकड़ी का गठन किया था, जिसे उन्होंने अपने नाम पर 'गंगा रिसाला' नाम दिया। इसने कई युद्धों में भाग लिया।
7. भू-राजस्व में राज्य का भाग निश्चित करने वाला अधिकारी किस नाम से जाना जाता था -
Answer: 'साहणे' या 'शहना' वह स्थानीय अधिकारी था जो खड़ी फसल का निरीक्षण करके यह तय करता था कि भू-राजस्व के रूप में राज्य का कितना हिस्सा होगा।
8. निम्नलिखित में से ग्राम प्रशासन के बारे में कौनसा कथन सत्य नहीं है -
Answer: पटवारी राज्य का एक कर्मचारी होता था जो भूमि का रिकॉर्ड रखता था, न कि गाँव का स्थायी स्थानीय अधिकारी। गाँव का मुखिया चौधरी या पटेल होता था।
9. डावी और जीवनी सामन्तों की श्रेणी राजस्थान में कहाँ प्रचलित थी -
Answer: जैसलमेर रियासत में, दरबार में शासक के बैठने के स्थान के आधार पर सामंतों को 'डावी' (बाईं ओर) और 'जीवनी' (दाईं ओर) श्रेणियों में विभाजित किया गया था।
10. उच्च वर्ग के लोगों या विद्वानों को राजस्व मुक्त भूमि अनुदान के रूप में दी जाती थी, यह भूमि क्या कहलाती थी -
Answer: 'मदद-ए-माश' एक फारसी शब्द है जिसका अर्थ 'जीविका के लिए सहायता' है। यह भूमि विद्वानों और धार्मिक व्यक्तियों को कर-मुक्त अनुदान के रूप में दी जाती थी।