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- भारत के प्रमुख खनिज और उनके क्षेत्र (Major Minerals of India)
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भारत के प्रमुख खनिज और उनके क्षेत्र (Major Minerals of India)

भारत के प्रमुख खनिज (Bharat ke Pramukh Khanij)
खनिज (Minerals): जिन शैलों में एक ही प्रकार के खनिजों का सकेंद्रण हो, उन्हें खनिज कहते हैं।
- उत्खनन (Quarrying): ऊपरी परत की खुदाई।
- खनन (Mining): गहराई के साथ की गयी खुदाई।
- ऊर्जा स्रोत: भारत में लगभग 56% ऊर्जा तापीय ऊर्जा (Thermal Energy) से प्राप्त होती है। (NTPC – National Thermal Power Corporation)।
खनिजों का वर्गीकरण (Classification of Minerals):
(a) लौह धातु: जिनमें लोहे का अंश हो (लौह अयस्क, मैंगनीज, निकल, कोबाल्ट)।
(b) अलौह धातु: जिनमें लोहा न हो (तांबा, सीसा, जस्ता, बॉक्साइट, टिन, मैग्नीशियम)।
उदा: चूना पत्थर, फॉस्फेट, डोलोमाइट, जिप्सम, संगमरमर, अभ्रक, हीरा, पन्ना, पाइराइट।
बहुमूल्य: सोना, चांदी, प्लेटिनम।
ऊर्जा: कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम, थोरियम।
भारत के प्रमुख खनिज क्षेत्र (Bharat ke Pramukh Khanij Kshetra)
भारत में खनिजों का वितरण असमान है। मुख्य रूप से 6 खनिज पेटियाँ (Mineral Belts) हैं:
इसे ‘भारतीय खनिज का हृदय स्थल’ (Mineral Heartland of India) कहा जाता है। यह भारत का सर्वाधिक महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र है।
विस्तार: छोटा नागपुर का पठार (झारखंड), ओडिशा का पठार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ का उत्तरी भाग। (Archean Shield Area)।
खनिज: देश की समृद्धतम खनिज पेटी। कोयला (100%), लौह-अयस्क (93%), अभ्रक, मैंगनीज, क्रोमाइट, तांबा, यूरेनियम।
महत्व: इसी पेटी में भारत के अधिकांश लौह-इस्पात कारखाने (जमशेदपुर, दुर्गापुर, बोकारो, राउरकेला) स्थित हैं।
विस्तार: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पूर्वी महाराष्ट्र।
खनिज: यह पेटी देश का अधिकांश मैंगनीज, बॉक्साइट, कोयला, ग्रेफाइट, चूना पत्थर, संगमरमर, हीरा (पन्ना) प्रदान करती है।
महत्व: यहाँ तापीय ऊर्जा संयंत्रों के लिए कोयला उपलब्ध है।
विस्तार: कर्नाटक का पठार और तमिलनाडु का उच्च क्षेत्र।
खनिज: यहाँ सोना (कोलार, हट्टी), लोहा, क्रोमाइट, मैंगनीज, लिग्नाइट (नेवेली – तमिलनाडु), चूना पत्थर पाया जाता है। (कोयला, तांबा, अभ्रक नगण्य है)।
विस्तार: दक्षिण कर्नाटक, गोवा, केरल।
खनिज: लौह अयस्क (गोवा – मारमुगाओ बंदरगाह से निर्यात), चिकनी मिट्टी। केरल में मोनाजाइट (थोरियम), इल्मेनाइट, जिर्कोन रेत।
विस्तार: अरावली (राजस्थान), गुजरात, महाराष्ट्र। यह क्षेत्र धारवाड़ क्रम की चट्टानों से जुड़ा है।
खनिज: सीसा-जस्ता, तांबा, यूरेनियम, अभ्रक, मुल्तानी मिट्टी, जिप्सम, रॉक फॉस्फेट, इमारती पत्थर, खनिज तेल (गुजरात – खंभात/अंकलेश्वर)।
विशेष: राजस्थान को ‘खनिजों का अजायबघर’ (Museum of Minerals) कहा जाता है। (सीसा-जस्ता, चांदी, जिप्सम, रॉक फॉस्फेट में एकाधिकार)।
विस्तार: पूर्व और पश्चिम हिमालय।
खनिज: धात्विक खनिजों के अल्प भंडार। तांबा, सीसा, जस्ता, कोबाल्ट, रंगीन रत्न। असम, मेघालय में खनिज तेल और कोयला।
नोट: हिन्द महासागर (Indian Ocean) भी खनिजों का महत्वपूर्ण स्रोत है। यहाँ से पॉलीमेटैलिक नोड्यूल (Polymetallic Nodules) निकालने का अधिकार भारत को प्राप्त है। इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स (IBM) द्वारा ‘Indian Mineral Year Book’ प्रकाशित की जाती है।
लौह अयस्क उत्पादन (Iron Ore Production)
यह आधुनिक औद्योगिक विकास की रीढ़ (Backbone) है। भारत में लौह अयस्क धारवाड़ और कुडप्पा युग की आग्नेय शैलों में पाया जाता है।
लौह अयस्क के प्रकार (Types)
| प्रकार | रासायनिक सूत्र | लौहांश % | रंग/विशेषता |
|---|---|---|---|
| 1. मैग्नेटाइट (Magnetite) | Fe₃O₄ | 70-72% | काला रंग (Black Ore)। सर्वोत्तम किस्म। चुंबकीय गुण। उत्पादक: कर्नाटक (73% – कुद्रेमुख, बाबाबूदन), आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु (सलेम)। |
| 2. हेमेटाइट (Haematite) | Fe₂O₃ | 60-70% | लाल रंग (Red Ochre)। भारत का सर्वाधिक महत्वपूर्ण औद्योगिक अयस्क। भंडार: ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ (बैलाडिला), कर्नाटक। |
| 3. लिमोनाइट (Limonite) | 2Fe₂O₃.3H₂O | 35-50% | पीला रंग। हाइड्रेटेड आयरन ऑक्साइड। (रानीगंज WB, गढ़वाल UK, मिर्जापुर UP)। |
| 4. सिडेराइट (Siderite) | FeCO₃ | 10-48% | भूरा रंग। (लौह कार्बोनेट)। सबसे निम्न कोटि। अशुद्धियाँ अधिक। |
प्रमुख लौह अयस्क क्षेत्र (Major Mines)
- ओडिशा: मयूरभंज (बादामपहाड़, गुरुमहिसानी, सुलापत), क्योंझर (बांसपानी, जादा), सुंदरगढ़। (भारत का शीर्ष उत्पादक राज्य)।
- छत्तीसगढ़: बैलाडिला (बस्तर – एशिया की सबसे बड़ी यंत्रीकृत खान) – यहाँ का अयस्क विशाखापत्तनम बंदरगाह से जापान निर्यात होता है। डल्ली-राजहरा (दुर्ग)।
- झारखंड: सिंहभूम जिला (नोआमुंडी, गुआ, किरिबुरू, पंसिरा बुरू)। (एशिया की सबसे बड़ी लौह मंडी – नोआमुंडी)।
- कर्नाटक: बेल्लारी-हॉस्पेट, बाबाबूदन की पहाड़ियाँ, केम्मनगुंडी, कुद्रेमुख (मुख घोड़े जैसा – स्लरी पाइपलाइन द्वारा मंगलौर भेजा जाता है)।
- महाराष्ट्र: रत्नागिरी, चंद्रपुर।
- गोवा: पिरना-अडोल, साक्युलीम। (मरमुगाओ बंदरगाह से निर्यात)।
मैंगनीज (Manganese) – धात्विक और अधात्विक खनिज
उपयोग: लौह-इस्पात विनिर्माण (Steel Alloy – कठोरता के लिए), शुष्क बैटरी (Dry Battery), फोटोग्राफी, चमड़ा, माचिस उद्योग, ब्लीचिंग पाउडर, कांच को रंगने में। (1 टन स्टील बनाने में लगभग 10 kg मैंगनीज लगता है)।
- अयस्क: पाइरोलुसाइट (Pyrolusite), साइलोमैलीन (Psilomelane), ब्रोनाइट।
- शीर्ष उत्पादक: 1. मध्य प्रदेश, 2. महाराष्ट्र, 3. ओडिशा।
- प्रमुख खदाने:
- मध्य प्रदेश: बालाघाट (भरवेली खान – एशिया की सबसे बड़ी मैंगनीज खदान), छिंदवाड़ा।
- महाराष्ट्र: नागपुर, भंडारा (डोंगरी बुजुर्ग), रत्नागिरी।
- ओडिशा: सुंदरगढ़ (बोनई), क्योंझर, कालाहांडी, कोरापुट, मयूरभंज।
- अन्य: श्रीकाकुलम (AP), शिवमोग्गा (Karnataka), पंचमहल (Gujarat), बांसवाड़ा (Rajasthan)।
तांबा (Copper)
मानव द्वारा प्रयोग की गई पहली धातु। यह आग्नेय, कायांतरित और अवसादी चट्टानों में नसों (Veins) के रूप में मिलता है। विद्युत का सुचालक।
मिश्र धातु: तांबा + टिन = कांसा (Bronze), तांबा + जस्ता = पीतल (Brass)।
- मध्य प्रदेश: बालाघाट (मलाजखंड क्षेत्र) – देश का 50% से अधिक तांबा उत्पादन। (शीर्ष उत्पादक)।
- राजस्थान: खेतड़ी-सिंघाना (झुंझुनू), खो-दरीबा (अलवर), देलवाड़ा-कीरोवली (उदयपुर), भीलवाड़ा (रामपुरा अगुचा)। (शीर्ष भंडार)।
- झारखंड: सिंहभूम (मोसाबनी, घाटशिला, राखा)।
HCL (Hindustan Copper Ltd): स्थापना 1967। (इकाइयां: खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स – राजस्थान, इंडियन कॉपर कॉम्प्लेक्स – घाटशिला, मलाजखंड कॉपर प्रोजेक्ट – MP, तलोजा – महाराष्ट्र)।
बॉक्साइट (Bauxite)
यह एल्युमीनियम (Aluminium) का मुख्य अयस्क है (Al₂O₃.2H₂O)। एल्युमीनियम हल्का, मजबूत, जंग रोधी और विद्युत सुचालक होता है। उपयोग: विमान निर्माण, बर्तन, विद्युत तार।
- निर्माण: लैटराइट चट्टानों के अपक्षय से।
- शीर्ष उत्पादक: 1. ओडिशा (कालाहांडी, कोरापुट – पंचपतमाली, संबलपुर – गंधमर्दन), 2. गुजरात (जामनगर, जूनागढ़), 3. झारखंड (लोहरदगा, लातेहार, पलामू – पाट प्रदेश), 4. छत्तीसगढ़ (अमरकंटक, कोरबा), 5. महाराष्ट्र (कोल्हापुर, रत्नागिरी)।
- भंडार: ओडिशा शीर्ष पर। (भारत विश्व में 5वें स्थान पर)।
अभ्रक (Mica)
विद्युत व इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में अत्यंत उपयोगी (विद्युत रोधी/Insulator, उच्च वोल्टेज सहन करने वाला)। भारत विश्व में अभ्रक (Sheet Mica) का सबसे बड़ा उत्पादक रहा है।
- किस्में: मस्कोवाइट (सफेद/रूबी अभ्रक – उत्तम कोटि), फ्नोगोपाइट (पीला), बायोटाइट (काला/श्याम अभ्रक)।
- प्रमुख उत्पादक क्षेत्र:
- आंध्र प्रदेश: नेल्लोर (गुंटूर, प्रकाशम) – विश्व प्रसिद्ध। (सर्वाधिक उत्पादन)।
- राजस्थान: भीलवाड़ा (‘अभ्रक नगरी’ / Brick making), अजमेर, उदयपुर।
- झारखंड: कोडरमा (‘भारत की अभ्रक राजधानी’), गिरिडीह, हजारीबाग।
बहुमूल्य खनिज (Khanij Sampada in India)
सोना (Gold – Au)
- धारवाड़ क्रम की शैलों (Quartz veins) में पाया जाता है।
- कर्नाटक: कोलार (KGF) और हट्टी (रायचूर) खाने। (भारत का 99% उत्पादन)।
- आंध्र प्रदेश: रामगिरी (अनंतपुर), चित्तूर।
- प्लेशर सोना: नदियों की रेत में (स्वर्णरेखा – झारखंड, सोन नदी)।
- भूखिया-जगपुरा (बांसवाड़ा, राजस्थान): नए भंडार मिले हैं।
हीरा (Diamond – C)
- कार्बन का शुद्धतम व प्राकृतिक रूप से ज्ञात कठोरतम पदार्थ।
- मध्य प्रदेश: पन्ना जिला (मझगवां खान) – देश का एकमात्र सक्रिय हीरा उत्पादक क्षेत्र। (विंध्यन क्रम की चट्टानें)।
- आंध्र प्रदेश: गोलकुंडा (ऐतिहासिक – कोहिनूर यहीं से मिला था), वद्रकुरुर (अनंतपुर), कृष्णा नदी बेसिन।
- कर्नाटक: रायचूर।
- कटिंग व पॉलिशिंग: सूरत, मुंबई, जयपुर।
अन्य महत्वपूर्ण खनिज
| खनिज | उपयोग | प्रमुख राज्य/क्षेत्र |
|---|---|---|
| सीसा-जस्ता (Lead-Zinc) | गैल्वनाइजेशन (लोहे को जंग से बचाने), बैटरी, रंग-रोगन। | राजस्थान (एकाधिकार): जावर (उदयपुर – मोचिया मगरा), रामपुरा-अगुचा (भीलवाड़ा – विश्व की सबसे बड़ी खान), चंदेरिया (चित्तौड़गढ़), राजपुरा-दरीबा। इन्हें ‘जुड़वा खनिज’ कहते हैं। |
| चांदी (Silver) | आभूषण, सिक्के, दर्पण पॉलिश। | राजस्थान: जावर (उदयपुर) – सीसा-जस्ता के साथ मिश्रित रूप में (उप-उत्पाद)। (सर्वाधिक उत्पादन)। कर्नाटक (कोलार) में सोने के साथ। |
| जिप्सम (Gypsum) | सीमेंट (जमने की दर कम करने), उर्वरक (अमोनियम सल्फेट), POP (प्लास्टर ऑफ पेरिस), क्षारीय मृदा सुधारक। | राजस्थान: बीकानेर (जामसर), नागौर (गोट मांगलोद, भदवासी), जैसलमेर (मोहनगढ़), बाड़मेर। (देश का 90%+ उत्पादन)। इसे ‘हरसोंठ’ भी कहते हैं। |
| चूना पत्थर (Limestone) | सीमेंट उद्योग (70%), लौह प्रगलन (Flux), चीनी उद्योग। | आंध्र प्रदेश (कड़प्पा), राजस्थान (चित्तौड़गढ़ – निंबाहेड़ा, जैसलमेर – सानू – Steel Grade), मध्य प्रदेश (कटनी, सतना)। |
| थोरियम (Thorium) | परमाणु ऊर्जा (मोनाजाइट बालू से प्राप्त)। | केरल: तटीय बालू (मोनाजाइट)। विश्व का सबसे बड़ा भंडार। |
| यूरेनियम (Uranium) | परमाणु ईंधन (Pitchblende अयस्क)। | झारखंड: जादूगोड़ा (सिंहभूम) – भारत की पहली यूरेनियम खान (1967)। आंध्र प्रदेश: तुम्मलपल्ली (कडप्पा – विशालतम भंडार)। मेघालय (डोमियासियात)। |
| टंगस्टन (Tungsten) | बल्ब का फिलामेंट, रक्षा उपकरण। अयस्क: वोल्फ्रामाइट। | राजस्थान: डेगाना (नागौर) – रेवंत की पहाड़ी। (वर्तमान में बंद)। प. बंगाल (बांकुरा)। |
| क्रोमाइट (Chromite) | स्टेनलेस स्टील, रिफ्रैक्टरी। | ओडिशा: सुकिंदा घाटी (कटक)। (90%+ एकाधिकार)। |
भारत में कोयला क्षेत्र (Bharat me Koyla Kshetra)
कोयला (Coal) एक ठोस जीवाश्म ईंधन है। इसे ‘काला सोना’ (Black Gold) भी कहते हैं। भारत में दो प्रमुख भूगर्भिक कालों का कोयला मिलता है:
- गोंडवाना कोयला (Gondwana Coal): देश का 98% कोयला। (25 करोड़ वर्ष पुराना)। मुख्य रूप से बिटुमिनस प्रकार का। दामोदर, महानदी, गोदावरी, सोन, वर्धा घाटियों में।
- टर्शियरी कोयला (Tertiary Coal): 15-60 लाख वर्ष पुराना। निम्न कोटि का (लिग्नाइट)। उत्तर-पूर्वी भारत (असम, मेघालय, अरुणाचल) और तमिलनाडु, राजस्थान में।
कोयले के प्रकार (Types):
- एंथ्रेसाइट (Anthracite): सर्वोत्तम (80-95% कार्बन)। केवल जम्मू-कश्मीर (रियासी) में।
- बिटुमिनस (Bituminous): भारत में सर्वाधिक पाया जाने वाला (55-80% कार्बन)। काला कोयला।
- लिग्नाइट (Lignite): भूरा कोयला (40-55% कार्बन)। नमी अधिक। तमिलनाडु (नेवेली – सबसे बड़ा भंडार), राजस्थान (पलाना, बरसिंगसर – बीकानेर)।
- पीट (Peat): सबसे निम्न कोटि (< 40% कार्बन)। लकड़ी जैसा।
प्रमुख कोयला क्षेत्र (Major Coal Fields)
- झारखंड: झरिया (धनबाद) – प्रमुख कोकिंग कोल क्षेत्र। बोकारो, गिरिडीह, करनपुरा। (भंडार में शीर्ष)।
- ओडिशा: तलचर (तालचेर) – महानदी घाटी। (उत्पादन में शीर्ष)।
- छत्तीसगढ़: कोरबा (हसदेव नदी), विश्रामपुर, तातापानी।
- मध्य प्रदेश: सिंगरौली (मोटी परत – 132m+), पेंच, सोहागपुर।
- प. बंगाल: रानीगंज – भारत की पहली कोयला खान (1774)।
- तेलंगाना: सिंगरेनी (गोदावरी घाटी)।
भारत में खनिज नीति (Bharat me Khanij Niti)
राष्ट्रीय खनिज नीति (National Mineral Policy – NMP):
- NMP 1993: उदारीकरण के बाद। निजी क्षेत्र को अनुमति।
- NMP 2008: वैज्ञानिक खनन और पारदर्शिता पर जोर।
- NMP 2019: खनन क्षेत्र को ‘उद्योग’ का दर्जा। (प्रभावी विनियमन, सतत विकास)।
- MMDR Act 1957: खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम। 2015 और 2021 में संशोधन (नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया, DMF – जिला खनिज फाउंडेशन की स्थापना)।