- भारत का सामान्य परिचय
- भारत के भू-आकृतिक प्रदेश
- भारत की जलवायु
- भारत की मृदा
- भारत की वनस्पति (Natural Vegetation)
- भारत के राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य
- भारत की कृषि (Agriculture)
- भारत के उद्योग धंधे
- भारत के प्रमुख खनिज और उनके क्षेत्र (Major Minerals of India)
- भारत की नदियाँ (Indian River System)
- भारत की जनगणना 2011
भारत के उद्योग धंधे
भारत के प्रमुख उद्योग धंधे (bharat ke udyog dhandhe)
विनिर्माण उद्योग (Manufacturing Industry): कच्चे पदार्थ को मूल्यवान उत्पाद में परिवर्तित कर अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन की प्रक्रिया को विनिर्माण कहते हैं। (जैसे: कपास से कपड़ा, बॉक्साइट से एल्युमीनियम, लौह-अयस्क से इस्पात, गन्ने से चीनी)।
स्वतंत्रता पूर्व औद्योगिक प्रयास:
- 1818: प्रथम सफल प्रयास (Fort Gloster, Kolkata) – सूती वस्त्र (असफल रहा)।
- 1854: मुंबई में ‘कावसजी डाबर’ (C.N. Davar) द्वारा प्रथम सफल सूती वस्त्र मिल की स्थापना। (1856 में उत्पादन प्रारंभ)।
- 1855: रिशरा (कोलकाता के निकट) – प्रथम जूट मिल।
- 1874: कुल्टी (प. बंगाल) – कच्चा लोहा बनाने का कारखाना (Bengal Iron Works)।
- 1907: जमशेदपुर (साकची) में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO) की स्थापना। जमशेदजी टाटा द्वारा।
स्वतंत्रता पश्चात् औद्योगिक विकास
- 6 अप्रैल 1948: प्रथम औद्योगिक नीति (First Industrial Policy)।
- 30 अप्रैल 1956: द्वितीय औद्योगिक नीति (इसे भारत का ‘औद्योगिक संविधान’ भी कहा जाता है)।
भारत के प्रमुख औद्योगिक प्रदेश (Industrial Regions)
bharat ke pramukh udyog kaun-kaun se hain और उनके क्षेत्र:
विस्तार: मुंबई, पुणे, नासिक, शोलापुर, कोल्हापुर, अहमदनगर, सतारा, सांगली, जलगांव।
कारण: कपास उत्पादक क्षेत्र और नम जलवायु के कारण यहाँ सूती वस्त्र उद्योग का विकास हुआ। (1854 में मिल स्थापना)।
हुगली नदी के किनारे बांसबेरिया (उत्तर) से बिड़लानगर (दक्षिण) तक 100 km क्षेत्र।
केन्द्र: कोलकाता, हावड़ा, हल्दिया, रिशरा, शिवपुर, काकीनारा, त्रिवेणी, बेलूर।
महत्व: 1855 में रिशरा में पहली जूट मिल। हिंदुस्तान मोटर्स (कोनगर – कार निर्माण), चितरंजन (डीजल इंजन)।
दक्षिणतम प्रदेश। तमिलनाडु के विल्लूपुरम को छोड़कर सभी जिलों में विस्तार। 1960 तक केवल बंगलुरु, सेलम, मदुरई तक सीमित था।
उद्योग: सूती वस्त्र, रेशम, भारी इंजीनियरिंग, पेट्रो-रसायन। सेलम में इस्पात संयंत्र।
केन्द्र: अहमदाबाद, वडोदरा, भरूच, सूरत, वलसाड, राजकोट, जामनगर, आनंद, खेड़ा।
विकास: 1860 में सूती वस्त्र उद्योग की स्थापना के साथ। तेल व पेट्रो-रसायन उद्योग (कोयली, अंकलेश्वर, जामनगर)।
विस्तार: झारखंड, ओडिशा, प. बंगाल। (कोयला व लौह अयस्क की उपलब्धता)।
उद्योग: भारी इंजीनियरिंग, मशीन औजार, उर्वरक, इस्पात। (6 एकीकृत लौह इस्पात संयंत्र: जमशेदपुर, बर्नपुर, कुल्टी, दुर्गापुर, बोकारो, राउरकेला)।
केन्द्र: रांची, धनबाद, चाईबासा, हजारीबाग, सिंदरी।
विस्तार: आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से कुर्नूल, प्रकाशम तक।
उद्योग: इस्पात, चीनी, उर्वरक, शोधनशाला, सीसा-जस्ता प्रगलाका (गुंटूर)। गोदावरी बेसिन के कोयले पर आधारित। विशाखापत्तनम में लौह-इस्पात संयंत्र (बैलाडिला से अयस्क)।
खनिज व विद्युत शक्ति के अभाव के बावजूद बाजार व परिवहन के कारण विकास।
केन्द्र: गुड़गांव, दिल्ली, फरीदाबाद, गाजियाबाद, मेरठ, मोदीनगर, मथुरा (रिफाइनरी), आगरा। अंबाला, पानीपत।
केरल। बागान कृषि, जलविद्युत व कोच्चि रिफाइनरी पर आधारित। केन्द्र: कोल्लम, तिरुवनंतपुरम, अलवाय, पुनालुर।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME)
MSMED Act, 2006 (संशोधन 1 जुलाई 2020) के अनुसार वर्गीकरण (विनिर्माण एवं सेवा उद्यम दोनों के लिए समान):
| श्रेणी | निवेश (Investment) | कारोबार (Turnover) |
|---|---|---|
| सूक्ष्म (Micro) | 1 करोड़ तक | 5 करोड़ तक |
| लघु (Small) | 10 करोड़ तक | 50 करोड़ तक |
| मध्यम (Medium) | 50 करोड़ तक | 250 करोड़ तक |
कुटीर उद्योग (Cottage Industry)
इसे ‘घरेलू उद्योग’ भी कहते हैं। दस्तकारों द्वारा हाथ से निर्माण (मिट्टी के बर्तन, टोकरी, बुनाई)।
प्रमुख संस्थान:
- कुटीर उद्योग बोर्ड: 1948
- अखिल भारतीय हस्तकला बोर्ड: 1953
- अखिल भारतीय खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड (KVIC): 1954
- भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI): 1990 (मुख्यालय: लखनऊ)
- राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: 7 अगस्त (1905 के स्वदेशी आंदोलन के सम्मान में)।
लौह-इस्पात उद्योग (Iron & Steel Industry)
यह आधारभूत उद्योग (Basic Industry) है। इसे ‘उद्योगों की धुरी’ भी कहते हैं। कच्चे माल (लौह अयस्क, कोकिंग कोयला, चूना पत्थर, मैंगनीज) का अनुपात लगभग 4:2:1 होता है। यह एक भारी उद्योग है।
भारत स्पंज आयरन (Sponge Iron) का सबसे बड़ा उत्पादक है।
भारत के प्रमुख लौह-इस्पात संयंत्र (bharat ke pramukh udyog)
| संयंत्र (Plant) | स्थान/राज्य | सहयोग/तथ्य | कच्चा माल स्रोत |
|---|---|---|---|
| TISCO | जमशेदपुर (झारखंड) – साकची | 1907 (निजी क्षेत्र – जमशेदजी टाटा) | लौह: नोआमुंडी, बादामपहाड़ (ओडिशा) कोयला: झरिया, प. बोकारो जल: स्वर्णरेखा व खरकई नदी |
| IISCO (Indian Iron & Steel Co.) | बर्नपुर (प. बंगाल) | 1918 (कुल्टी 1874, हीरापुर 1908, बर्नपुर 1937 का विलय) | लौह: गुआ (झारखंड) कोयला: रामनगर, झरिया जल: दामोदर नदी |
| VISL (मैसूर आयरन) | भद्रावती (कर्नाटक) | 1923 (सार्वजनिक क्षेत्र की प्रथम इकाई) | लौह: बाबाबूदन (केम्मनगुंडी) ऊर्जा: पहले लकड़ी, अब शरावती जलविद्युत |
| राउरकेला (HSL) | सुंदरगढ़ (ओडिशा) | 1959 (जर्मनी – क्रुप्स एंड डेमाग) | लौह: सुंदरगढ़, क्योंझर, बोनाई कोयला: झरिया, तलचर, कोरबा जल: कोयल-शंख नदी (हीराकुंड बांध) |
| भिलाई (HSL) | दुर्ग (छत्तीसगढ़) | 1955 (सोवियत संघ/रूस) | लौह: डल्ली-राजहरा कोयला: कोरबा, करगाली जल: तंदुला नहर |
| दुर्गापुर (HSL) | आसनसोल (प. बंगाल) | 1959 (ब्रिटेन) | लौह: नोआमुंडी (झारखंड), बोलानी (ओडिशा) कोयला: रानीगंज, झरिया जल: दामोदर (DVC) |
| बोकारो | बोकारो (झारखंड) | 1964 (रूस) – 1972 में उत्पादन | लौह: किरिबुरू (ओडिशा) कोयला: झरिया परिवहन अनुकूलता के सिद्धांत पर। |
| विशाखापत्तनम (Vizag) | आंध्र प्रदेश | तटीय संयंत्र (Shore based) | लौह: बैलाडिला (छत्तीसगढ़) कोयला: दामोदर घाटी (आयात: ऑस्ट्रेलिया) |
| सलेम | तमिलनाडु | स्टेनलेस स्टील | लौह: शेवराय पहाड़ियां लिग्नाइट: नेवेली |
| विजयनगर | हॉस्पेट (कर्नाटक) | 1994 | लौह: हॉस्पेट |
नोट: 24 जनवरी 1973 को SAIL (Steel Authority of India Ltd.) की स्थापना की गई (पूंजी 2000 करोड़)। यह भिलाई, दुर्गापुर, बोकारो, राउरकेला, बर्नपुर, सलेम, विश्वेश्वरैया का प्रबंधन करती है।
एल्युमीनियम उद्योग (Aluminium Industry)
यह भारत का दूसरा सर्वाधिक महत्वपूर्ण धातु शोधन उद्योग है। हल्का, जंग अवरोधी। भारत का पहला कारखाना 1937 में जे.के. नगर (प. बंगाल) में लगा (Aluminium Corporation of India)।
| कंपनी | सहयोगी देश | प्रमुख केन्द्र | बॉक्साइट स्रोत |
|---|---|---|---|
| BALCO (भारत एल्युमीनियम – 1965) | सोवियत संघ (रूस) | कोरबा (छत्तीसगढ़), रत्नागिरी (महाराष्ट्र – कोयना) | अमरकंटक (MP) |
| NALCO (नेशनल एल्युमीनियम – 1981) | फ्रांस | दामनजोड़ी (ओडिशा) – एशिया का सबसे बड़ा संयंत्र। | पंचपतमाली (कोरापुट, ओडिशा) |
| HINDALCO (हिन्दुस्तान – 1958) | USA | रेणुकूट (UP) – रिहंद बांध के पास। | झारखंड (लोहरदगा) |
| INDALCO (इण्डियन – 1938) | कनाडा | मुरी (झारखंड), अलवाय (केरल), हीराकुंड (ओडिशा), बेलगाम (कर्नाटक)। | झारखंड |
| MALCO (मद्रास – 1965) | इटली | चेन्नई, मेट्टूर (TN)। | शेवराय, जावादी (TN) |
| VEDANTA (2004) | जर्मनी | झारसुगुडा (ओडिशा)। | ओडिशा |
वस्त्र उद्योग (Textile Industry)
(A) सूती वस्त्र उद्योग (Cotton Textile)
भारत का सबसे विशाल उद्योग। कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता। 1818 में फोर्ट ग्लोस्टर (कोलकाता) में पहली मिल (असफल)। 1854 में मुंबई में सफल मिल।
- मुंबई: सूती कपड़ों की महानगरी (Cottonopolis)। (नमी युक्त जलवायु)।
- अहमदाबाद: भारत का मैनचेस्टर / पूर्व का बोस्टन।
- कानपुर: उत्तर भारत का मैनचेस्टर।
- कोयंबटूर: दक्षिण भारत का मैनचेस्टर।
- भीलवाड़ा: वस्त्र निर्यातक नगर (2009)।
- तिरुपुर (TN): देश का ‘Apparel Park’ (सिले-सिलाए वस्त्रों के निर्यात संवर्धन हेतु)।
(B) रेशम उद्योग (Silk Industry)
भारत रेशम की चारों किस्मों (शहतूती, एरी, टसर, मूंगा) का उत्पादन करने वाला एकमात्र देश है। मूंगा रेशम में भारत को एकाधिकार प्राप्त है।
- उत्पादक: कर्नाटक (शीर्ष – 32% कच्चा रेशम), आंध्र प्रदेश (21%), असम, प. बंगाल, J&K (कश्मीरी सिल्क)।
- अनुसंधान केंद्र:
- केंद्रीय रेशम अनुसंधान: मैसूर (कर्नाटक) व बहरामपुर (WB)।
- केंद्रीय ईरी अनुसंधान: मेंदीपाथर (मेघालय)।
- केंद्रीय टसर अनुसंधान: रांची (झारखंड)।
- रेशम भारत के कुल कपड़ा निर्यात का 3.1% है।
(C) ऊनी वस्त्र उद्योग
पहला कारखाना: 1876, कानपुर (लाल इमली)। केन्द्र: लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, धारीवाल (पंजाब)। पश्मीना ऊन (कश्मीर), अंगोरा ऊन (खरगोश)।
(D) कृत्रिम वस्त्र (Artificial Fibre)
नायलॉन, पॉलिएस्टर, रेयान। केन्द्र: मुंबई, सूरत, दिल्ली, अमृतसर, ग्वालियर।
(E) जूट/पटसन उद्योग (Jute Industry)
Golden Fibre (सुनहरा रेशा)। भारत विश्व में जूट का सबसे बड़ा उत्पादक है (60%)।
- पहला कारखाना: 1855, रिशरा (कोलकाता)।
- विस्तार: हुगली नदी के दोनों किनारों पर (90% मिलें)। पश्चिम बंगाल (81% उत्पादन), आंध्र प्रदेश, बिहार।
- भारतीय जूट निगम: 1971 में स्थापना (आयात-निर्यात हेतु)।
- अंतर्राष्ट्रीय जूट संगठन: 1984 (मुख्यालय: ढाका, बांग्लादेश)।
अन्य महत्वपूर्ण उद्योग (bharat ke udyog notes)
चीनी उद्योग (Sugar Industry)
ब्राजील के बाद भारत का विश्व में दूसरा स्थान।
- प्रथम मिल: 1903, प्रतापपुर (देवरिया, UP)।
- शक्कर का प्याला: उत्तर प्रदेश।
- शक्कर नगर: तेलंगाना (प्रमुख उत्पादक केंद्र)।
- उत्पादक: 1. UP, 2. महाराष्ट्र, 3. कर्नाटक।
- दक्षिण भारत में गन्ने में शर्करा की मात्रा अधिक होती है।
सीमेंट उद्योग (Cement)
कच्चा माल: चूना पत्थर, सिलिका, एल्युमिना, जिप्सम। (भारी कच्चा माल)।
- पहला कारखाना: 1904, चेन्नई (असफल, सीपियों पर आधारित)।
- पहला सफल: 1914, पोरबंदर (गुजरात) – इंडियन सीमेंट कंपनी।
- एसीसी (ACC): 1936 में स्थापना।
- विस्तार: दिल्ली, गुड़गांव, मुंबई, पुणे, चेन्नई, लखनऊ, इंदौर।
रासायनिक उर्वरक (Fertilizer)
- पहला कारखाना: 1906, रानीपेट (TN) – सुपर फॉस्फेट।
- अमोनिया सल्फेट: 1944, अलवाय (केरल) – FACT।
- सिंदरी (झारखंड): 1951, एशिया का सबसे बड़ा उर्वरक संयंत्र (FCI – Fertilizer Corp. of India)।
- सहकारी: IFFCO (1967), KRIBHCO (1980)।
- गैस आधारित: हजीरा (गुजरात), शाहजहांपुर, जगदीशपुर (UP)।
- भारत पोटाश के लिए पूर्णतः आयात पर निर्भर है। प्रति हेक्टेयर खपत में पुडुचेरी, तेलंगाना, पंजाब शीर्ष पर।
शीशा उद्योग (Glass)
- केन्द्र: फिरोजाबाद (चूड़ियां), शिकोहाबाद। बेलगछिया (WB)।
परिवहन उपकरण उद्योग
- रेलवे इंजन: चितरंजन लोकोमोटिव (WB) – विद्युत इंजन। वाराणसी (डीजल इंजन)।
- पहिया कारखाना: यलहंका (बंगलुरु), छपरा (बिहार)।
- मोटरगाड़ी: 1928 में मुंबई (जनरल मोटर्स)। मारुति उद्योग – गुरुग्राम (हरियाणा)। सनराइज इंडस्ट्रीज – बंगलुरु।
- जलपोत (Ship Building):
- हिंदुस्तान शिपयार्ड: विशाखापत्तनम (1941 – सिंधिया स्टीम, 1952 में राष्ट्रीयकरण)।
- गार्डन रीच वर्कशॉप: कोलकाता (पश्चिम बंगाल)।
- गोवा शिपयार्ड: गोवा।
- मझगांव डॉक: मुंबई (नौसेना के पोत)।
- कोच्चि शिपयार्ड: कोच्चि (केरल)।
महारत्न और नवरत्न कंपनियाँ
Note: महारत्न कंपनियों की संख्या अब 13 हो गई है।
| मानक | महारत्न (Maharatna) | नवरत्न (Navratna) | मिनीरत्न-I |
|---|---|---|---|
| शर्तें |
1. 3 वर्षों तक 2500/5000 करोड़+ शुद्ध लाभ। 2. औसत टर्नओवर 20,000/25,000 करोड़। 3. औसत नेट वर्थ 10,000/15,000 करोड़। 4. नवरत्न का दर्जा प्राप्त हो। |
1. 1000 करोड़ का शुद्ध लाभ। 2. मिनीरत्न-I का दर्जा प्राप्त हो। 3. 6 प्रदर्शन मानकों पर 60 स्कोर। |
3 वर्षों तक लगातार लाभ। (औसत लाभ 30 करोड़)। |
| निवेश स्वायत्तता | 5000 करोड़ या नेट वर्थ का 15% (जो कम हो)। | 1000 करोड़ या नेट वर्थ का 15%। | 500 करोड़। |
| संख्या | 13 कंपनियाँ | 13+ कंपनियाँ | 61+ कंपनियाँ |
- IOCL (1964)
- NTPC (1975)
- ONGC (1956)
- SAIL (1973)
- CIL (1975)
- BHEL (1964)
- GAIL (1984)
- BPCL (1977)
- Power Grid (1989)
- HPCL (1974)
- PFC (Power Finance Corp) – 2021
- REC (Rural Electrification) – 2022
- OIL (Oil India Ltd) – 2023
प्रमुख नवरत्न: HAL, BEL, MTNL, NALCO, SCI, NBCC आदि।
मेक इन इंडिया (Make in India)
शुभारंभ: 25 सितंबर 2014।
उद्देश्य: भारत को वैश्विक विनिर्माण हब (Global Manufacturing Hub) बनाना। जीडीपी में विनिर्माण का हिस्सा 16% से बढ़ाकर 25% करना। रोजगार बढ़ाना। विदेशी निवेश को आकर्षित करना।
प्रतीक (Logo): कोग्स (Cogs) से बना हुआ शेर (Lion)।
अभ्यास प्रश्न (bharat ke pramukh udyog mcq)
Q1. भारत का प्रथम सफल सूती वस्त्र कारखाना कहाँ स्थापित किया गया?
उत्तर: मुंबई (1854 में कावसजी डाबर द्वारा)।
Q2. ‘भारत का बोस्टन’ या ‘पूर्व का बोस्टन’ किसे कहा जाता है?
उत्तर: अहमदाबाद (गुजरात)।
Q3. भिलाई इस्पात संयंत्र किस देश के सहयोग से स्थापित किया गया?
उत्तर: सोवियत संघ (रूस)।
Q4. भारत में एल्युमीनियम का पहला कारखाना कहाँ स्थापित हुआ?
उत्तर: जे.के. नगर, पश्चिम बंगाल (1937)।
Q5. ‘सुनहरा रेशा’ (Golden Fibre) किस उद्योग को कहा जाता है?
उत्तर: जूट उद्योग।
Q6. राउरकेला इस्पात संयंत्र किस नदी के किनारे स्थित है?
उत्तर: ब्राह्मणी (कोयल और शंख नदियों के संगम पर)।