गुर्जर प्रतिहार वंश
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51. जोधपुर से प्राप्त घटियाला शिलालेख से किस प्रतिहार राजा की जानकारी मिलती है -
Answer: घटियाला (जोधपुर) से प्राप्त शिलालेख मंडोर शाखा के प्रतिहार शासक कक्कुक के बारे में जानकारी देता है।
52. निम्नलिखित प्रतिहार शासकों में से किसने मण्डोर को बदलकर मेड़ता को राजधानी बनाया -
Answer: मंडोर शाखा के शासक नागभट्ट प्रथम ने अपने राज्य का विस्तार किया और मेड़ता को अपनी नई राजधानी बनाया।
53. किस प्रतिहार शासक के शासनकाल में उद्योतन सूरि ने कुवलयमाला ग्रन्थ की रचना की -
Answer: जैन विद्वान उद्योतन सूरि ने 778 ई. में प्रतिहार शासक वत्सराज के शासनकाल में जालौर में 'कुवलयमाला' ग्रंथ की रचना की।
54. प्रतिहार के संस्थापक हरिशचंद्र की कौन सी राजधानी थी -
Answer: गुर्जर-प्रतिहार वंश के संस्थापक हरिश्चंद्र ने जोधपुर के पास स्थित मंडोर को अपनी प्रारंभिक राजधानी बनाया था।
55. उस प्रतिहार शासक का नाम बताइये जिसने न केवल अरबों के आगे बढ़ने पर अंकुश लगाया बल्कि अनेक शासकों को उनके आधिपत्य से भी मुक्त किया -
Answer: नागभट्ट प्रथम ने न केवल अरबों को रोका बल्कि कई छोटे राज्यों को अरबों के शासन से मुक्त भी कराया।
56. ओसियां के कलात्मक मन्दिरों का निर्माण कराया -
Answer: जोधपुर के पास ओसियां में स्थित सूर्य मंदिर और हरिहर मंदिर जैसे भव्य मंदिरों का निर्माण गुर्जर-प्रतिहार शासकों, विशेषकर वत्सराज के समय में हुआ था।
57. निम्नलिखित में से कौन सा शासक गुर्जर-प्रतिहार राजवंश से संबंधित नहीं है -
Answer: नागभट्ट द्वितीय, महेंद्रपाल प्रथम और देवपाल, सभी गुर्जर-प्रतिहार वंश के प्रमुख शासक थे, जबकि भरत्रभट्ट इस वंश से संबंधित नहीं है।
58. किस राजा के वंशज गुर्जर प्रतिहार कहे जाने लगे -
Answer: नागभट्ट द्वितीय ने कन्नौज पर विजय प्राप्त कर एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की, जिसके बाद उनके वंशज प्रमुखता से गुर्जर-प्रतिहार सम्राट कहलाए।
59. निम्न में से किस विदेशी यात्री ने गुर्जर-प्रतिहार वंश की सैन्य शक्ति एवं समृद्धि का उल्लेख किया है -
Answer: अरब सौदागर और यात्री सुलेमान ने मिहिर भोज के साम्राज्य का दौरा किया और उनकी शक्तिशाली सेना और सुव्यवस्थित शासन की प्रशंसा की।
60. कन्नौज पर अधिकार हेतु चले त्रिपक्षीय युद्ध में राजपूताना के किस वंश के शासकों ने भाग लिया -
Answer: 8वीं से 10वीं शताब्दी तक कन्नौज पर अधिकार के लिए चले त्रिपक्षीय संघर्ष में राजस्थान के गुर्जर-प्रतिहारों ने एक प्रमुख भूमिका निभाई।