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गुर्जर प्रतिहार वंश

गुर्जर प्रतिहार वंश
61. मण्डोर शाखा के निम्नलिखित प्रतिहार शासकों पर विचार कीजिए- (i) नागभट्ट I(ii) रज्जिल(iii) बाउका(iv) टाटाइन शासकों का सही कालानुक्रम है -
  • A. (i), (iii), (ii), (iv)
  • B. (iii), (iv), (i), (ii)
  • C. (i), (ii), (iv), (iii)
  • D. (ii), (i), (iv), (iii)
Answer: मंडोर शाखा के राजाओं का सही क्रम है: रज्जिल, उसका पुत्र नागभट्ट प्रथम, नागभट्ट का उत्तराधिकारी टाट, और फिर बाउक।
62. राजस्थान में प्रतिहार वंश के संस्थापक हरिश्चन्द्र की राजधानी थी -
  • A. मेड़ता
  • B. जालौर
  • C. भीनमाल
  • D. मण्डोर
Answer: गुर्जर-प्रतिहार वंश के संस्थापक हरिश्चंद्र की राजधानी जोधपुर के निकट स्थित मंडोर थी।
63. नागभट्ट-प्रथम निम्नलिखित में से किस राजवंश से संबंधित है -
  • A. परमार
  • B. गुर्जर-प्रतिहार
  • C. चौहान
  • D. चालुक्य
Answer: नागभट्ट प्रथम गुर्जर-प्रतिहार वंश का एक शक्तिशाली शासक था, जिसे साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक भी माना जाता है।
64. निम्नलिखित में से प्रतिहार राजा नागभट्ट प्रथम के बारे में कौन-सा कथन सही है -
  • A. वे वत्सराज के पुत्र थे।
  • B. उन्होंने लगभग 50 वर्षों तक शासन किया।
  • C. उनकी मृत्यु के बाद महिपाल और भोज द्वितीय के बीच उत्तराधिकार बनने के लिए युद्ध हुआ।
  • D. उन्होंने सिंध के अरब शासकों को हराया जो राजस्थान, गुजरात, पंजाब आदि पर अतिक्रमण करने की कोशिश कर रहे थे।
Answer: यह कथन सही है। नागभट्ट प्रथम ने अरबों को सफलतापूर्वक पराजित किया और पश्चिमी भारत में उनके विस्तार को रोका।
65. प्रतिहार साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है -
  • A. नागभट्ट प्रथम
  • B. वत्सराज
  • C. मिहिरभोज
  • D. नागभट्ट द्वितीय
Answer: नागभट्ट प्रथम ने वंश को एक सुदृढ़ सैन्य और प्रशासनिक आधार प्रदान किया, इसलिए उन्हें वास्तविक संस्थापक माना जाता है।
66. गुर्जर प्रतिहार शासक मथन देव कहाँ शासन करता था -
  • A. मंडोर
  • B. राजोरगढ़
  • C. जालौर
  • D. मेड़ता
Answer: मथनदेव, गुर्जर-प्रतिहारों की एक शाखा का शासक था और उसका शासन अलवर के पास राजोरगढ़ क्षेत्र में था।
67. मिहिरभोज प्रथम और उनके उत्तराधिकारियों के योगदान के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है -
  • A. मिहिरभोज ने राष्ट्रकूटों को पराजित कर उज्जैन पर अधिकार किया और उन्हें ‘आदिवराह’ की उपाधि मिली।
  • B. महेन्द्रपाल प्रथम के दरबार में राजशेखर ने ‘कर्पूरमंजरी’ और ‘काव्यमीमांसा’ जैसे ग्रंथों की रचना की।
  • C. महिपाल प्रथम के समय राष्ट्रकूट इन्द्र तृतीय ने कन्नौज को नष्ट किया, जिससे प्रतिहार शक्ति कमजोर हुई।
  • D. मिहिरभोज ने अपने पुत्र महिपाल प्रथम को राज्य सौंपकर तीर्थयात्रा के लिए सिंहासन त्याग दिया।
Answer: यह कथन असत्य है। मिहिरभोज ने अपने पुत्र महेंद्रपाल प्रथम को राज्य सौंपा था, न कि महिपाल को।
68. प्रतिहार एवं पाल शासकों पर अपनी विजय की खुशी में ध्रुव ने गंगा व यमुना के चिह्नों को सम्मिलित किया-
  • A. राष्ट्रकूट कुल चिह्न (एम्बलम) में
  • B. चोल कुल चिह्न (एम्बलम) में
  • C. चन्देल कुल चिह्न (एम्बलम) में
  • D. पाल कुल चिह्न (एम्बलम) में
Answer: राष्ट्रकूट शासक ध्रुव ने उत्तर भारत में अपनी विजय के प्रतीक के रूप में पवित्र नदियों गंगा और यमुना के चिह्नों को अपने राजचिह्न में शामिल किया।
69. उस अरबी यात्री का नाम बताइये जिसने मिहिर भोज के समय का वृत्तांत प्रस्तुत किया।
  • A. ओबेदुल्लाह हुसैनी
  • B. सुलेमान
  • C. शाहआलम निरून
  • D. अल मसूदी हज्जाब
Answer: अरब यात्री सुलेमान ने प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज के शासनकाल का वर्णन किया है और उन्हें अरबों का सबसे बड़ा शत्रु बताया है।
70. अरब यात्री अलमसूदी ने किस प्रतिहार शासक के शासन-काल में भ्रमण किया -
  • A. नागभट्ट प्रथम
  • B. महीपाल
  • C. वत्सराज
  • D. नागभट्ट द्वितीय
Answer: बगदाद का यात्री अल-मसूदी, प्रतिहार शासक महिपाल प्रथम के शासनकाल के दौरान भारत आया था।