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राजस्थान का साहित्य

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201. वंशावलियों का पीढ़ी-दर-पीढ़ी लेखन करने वाला कौन वर्ग था -
  • A. जागा
  • B. पुजारी
  • C. महाजन
  • D. उपरोक्त सभी
Answer: जागा समुदाय के लोग परंपरागत रूप से विभिन्न वंशों और कुलों की वंशावलियों को लिखने और उनका रिकॉर्ड रखने का कार्य करते थे।
202. वै कुणसा कवि है जकां री भगति अर चमत्कार री वजै सूं लोग बांनै ‘परमेसर’ रै समान बतावण लागा हा -
  • A. बारहठ ईसरदास
  • B. राठौड़ पृथ्वीराज
  • C. सायांजी झूला
  • D. माधोदास दधवाड़िया
Answer: बारहठ ईसरदास अपनी गहन भक्ति और चमत्कारों के लिए इतने प्रसिद्ध थे कि लोग उन्हें ईश्वर (परमेसर) का अवतार मानने लगे थे।
203. हाड़ौती अंचल रा चावा गीतकार है -
  • A. रेवंतदान चारण
  • B. चन्द्रसिंह हाड़ा
  • C. रघुराजसिंह हाड़ा
  • D. गणेशलाल व्यास
Answer: रघुराजसिंह हाड़ा को हाड़ौती क्षेत्र के एक प्रसिद्ध और लोकप्रिय गीतकार के रूप में जाना जाता है।
204. ‘पद्मणी चउपई’ किस भाषा में लिखित ग्रंथ है -
  • A. प्राकृत
  • B. डींगल
  • C. राजस्थानी
  • D. अपभ्रंश
Answer: 'पद्मणी चउपई' ग्रंथ की रचना राजस्थानी भाषा में की गई थी, जो उस समय की एक प्रमुख साहित्यिक भाषा थी।
205. राजस्थानी साहित्य में किसी राजा या व्यक्ति के मरणोपरांत उसके चरित्र के वर्णन का काव्य क्या कहलाता था -
  • A. रासो
  • B. वचनिका
  • C. मरस्या
  • D. दवावैत
Answer: 'मरस्या' एक प्रकार का शोक काव्य है, जिसमें किसी वीर पुरुष या राजा की मृत्यु के बाद उसके शौर्य और गुणों का वर्णन किया जाता है।
206. ‘भारतीय प्राचीन लिपि माला’ के लेखक हैं -
  • A. गौरीशंकर हीराचंद ओझा
  • B. डा. दशरथ शर्मा
  • C. कविराजा श्यामलदास
  • D. हरविलास शारदा
Answer: यह महत्वपूर्ण ग्रंथ, जो प्राचीन भारतीय लिपियों पर एक आधिकारिक कार्य है, प्रसिद्ध इतिहासकार और पुरालिपिशास्त्री गौरीशंकर हीराचंद ओझा द्वारा लिखा गया था।
207. वंशावलियों का पीढ़ी-दर-पीढ़ी लेखन करने वाला कौन वर्ग था -
  • A. पुजारी
  • B. जागा
  • C. महाजन
  • D. ये सभी
Answer: जागा जाति का पारंपरिक कार्य विभिन्न कुलों और राजवंशों की वंशावलियों को लिखना और उन्हें पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित करना था।
208. शीन काफ निज़ाम (शिव किशन बिस्सा) को 2025 में किस क्षेत्र में पद्म श्री से सम्मानित किया गया -
  • A. साहित्य और शिक्षा
  • B. कला
  • C. अन्य - आध्यात्मिकता
  • D. सामाजिक कार्य
Answer: शीन काफ निज़ाम (वास्तविक नाम: शिव किशन बिस्सा) एक प्रसिद्ध उर्दू कवि और साहित्यकार हैं। उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया है।
209. ‘बादली’ के रचनाकार हैं -
  • A. यादवेन्द्र शर्मा
  • B. मेघराज मुकुल
  • C. बीठू सूजा जी
  • D. चंद्रसिंह बिरकाली
Answer: 'बादली' आधुनिक राजस्थानी काव्य की एक प्रसिद्ध कृति है, जिसकी रचना चंद्रसिंह बिरकाली ने की थी।
210. लोक काव्य सैली री रचना कुणसी है -
  • A. किसन ब्‍यावलो
  • B. ढोला मारू रा दूहा
  • C. नवरस वेलि
  • D. रूकमणि मंगल
Answer: 'ढोला मारू रा दूहा' एक प्रसिद्ध लोक गाथा है, जो लोक काव्य शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और इसे दोहों के माध्यम से गाया जाता है।
211. ‘चंदनबाला रास’ काव्यरूप री दीठ सूं किण भांत रो काव्य है -
  • A. खंडकाव्य
  • B. मुक्तककाव्य
  • C. मिश्रकाव्य
  • D. महाकाव्य
Answer: 'चंदनबाला रास' को खंडकाव्य माना जाता है क्योंकि यह नायिका चंदनबाला के जीवन की एक विशेष घटना या अंश का वर्णन करता है, न कि संपूर्ण जीवन का।
212. ‘सुर्जन चरित’ के रचनाकार कौन थे -
  • A. जयानक
  • B. करणीदान
  • C. मण्डन
  • D. चन्द्रशेखर
Answer: 'सुर्जन चरित' महाकाव्य की रचना कवि चन्द्रशेखर ने की थी, जो बूंदी के शासक राव सुर्जन हाड़ा के दरबारी कवि थे।
213. निम्नलिखित में से कौन के लेखक हैं “एक बीनणी दो बीन” -
  • A. शिव चंद्र भारतीय
  • B. हरीश भुदानी
  • C. श्रीलाल नथमल जोशी
  • D. कवि चंद्र सिंह
Answer: 'एक बीनणी दो बीन' राजस्थानी साहित्य का एक प्रसिद्ध उपन्यास है, जिसके लेखक श्रीलाल नथमल जोशी हैं।
214. कुणसी साहित्यिक कृति राजस्थानी साहित्य रै आदिकाल संबंधित है -
  • A. नेमिनाथ रास
  • B. विरुद छिहतरी
  • C. रुकमणी हरण
  • D. वेलि क्रिसन रुकमणि री
Answer: 'नेमिनाथ रास' एक प्राचीन जैन रचना है, जिसे राजस्थानी साहित्य के आदिकाल (प्रारंभिक चरण) की कृति माना जाता है।
215. ढोला-मारू-रा-दोहा का रचनाकार कौन था -
  • A. बीठू सूजो
  • B. कल्लोल
  • C. कृपाराम बारहठ
  • D. ईसरदास
Answer: इस प्रसिद्ध राजस्थानी प्रेम गाथा के मूल रचयिता कवि कल्लोल माने जाते हैं। बाद में कुछ अन्य कवियों ने भी इसमें दोहे जोड़े।
216. निम्नलिखित में से कौन सा ‘केसरी सिंह बारहठ’ द्वारा नहीं लिखा गया है -
  • A. दुर्गादास चरित्र
  • B. रूठी रानी और प्रेम
  • C. राज सिंह चरित्र
  • D. प्रताप चरित्र
Answer: केसरी सिंह बारहठ ने 'रूठी रानी' नामक रचना की थी, लेकिन 'रूठी रानी और प्रेम' नाम से कोई विशिष्ट कृति नहीं है। अन्य तीनों रचनाएँ उनकी हैं।
217. ‘समराइच्च्कहा’ का रचयिता कौन था -
  • A. जिनपाल
  • B. जिनेश्वर
  • C. हरिभद्र सूरी
  • D. उद्दयोतन सूरी
Answer: 'समराइच्च्कहा' (समरादित्यकथा) प्राकृत भाषा का एक प्रसिद्ध कथा ग्रंथ है, जिसकी रचना आचार्य हरिभद्र सूरी ने की थी।
218. करणी शतक, चुंडा शतक और हाड़ी शतक जैसी पुस्तकें किसने लिखी हैं -
  • A. नाथू सिंह महियारिया
  • B. सवाई सिंह धमोला
  • C. चंदीदान संदू
  • D. मुरारीदान
Answer: नाथू सिंह महियारिया ने वीर रस से परिपूर्ण कई शतक काव्यों की रचना की, जिनमें करणी शतक, चुंडा शतक और हाड़ी शतक प्रमुख हैं।
219. निम्न में से कौन सी रचना कान्हड़ देव और अलाउद्दीन खिलजी के आपसी संबंधों की जानकारी देती है -
  • A. सुर्जन चरित्र
  • B. वीरमदेव सोनगरा री बात
  • C. पद्मावत
  • D. एकलिंग महात्मय
Answer: पद्मनाभ द्वारा रचित 'कान्हड़दे प्रबन्ध' और 'वीरमदेव सोनगरा री बात' में जालोर के शासक कान्हड़ देव और अलाउद्दीन खिलजी के बीच हुए संघर्ष का विस्तृत वर्णन मिलता है।
220. बूंदी के 19वीं सदी के वह कवि कौन हैं जो “राजस्थान भूषण” के रूप में जाने जाते हैं क्योंकि उन्होंने वीर सत्सई और वंश भास्कर के माध्यम से वीरकाव्य को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया था -
  • A. रामनाथ कविया
  • B. सूर्यमल्ल मिश्रण
  • C. अथ्युधन महरिया
  • D. चंद्र सिंह
Answer: बूंदी के राजकवि सूर्यमल्ल मिश्रण ने 'वंश भास्कर' और 'वीर सतसई' जैसे ग्रंथों की रचना की। उन्हें वीर काव्य को पुनर्जीवित करने के लिए 'राजस्थान भूषण' के रूप में जाना जाता है।