राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ
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291. निम्नलिखित में से कौन सा (पुरातात्विक स्थल - उत्खननकर्ता) सुमेलित नहीं है -
Answer: ओझियाना (भीलवाड़ा) का उत्खनन बी.आर. मीणा और आलोक त्रिपाठी ने किया था, न कि के.एन. पुरी ने। अन्य सभी विकल्प सही हैं।
292. निम्नलिखित में से कौन सा कथन बैराठ सभ्यता के बारे में सही नहीं है -
Answer: बैराठ सभ्यता का विकास बाणगंगा नदी के तट पर हुआ था, न कि लूणी नदी के तट पर। इसलिए यह कथन गलत है।
293. राजस्थान में ताम्र युगीन सभ्यताओं की जननी कहा जाता है।
Answer: गणेश्वर को अपनी प्राचीनता और यहां से अन्य सभ्यताओं को तांबे की आपूर्ति करने के कारण 'ताम्र युगीन सभ्यताओं की जननी' कहा जाता है।
294. निम्नलिखि में से किस स्थल से ‘जाखबाबा’ प्रतिमा प्राप्त हुई है -
Answer: भरतपुर के नोह नामक पुरातात्विक स्थल से शुंग-कुषाण काल की विशालकाय 'जाखबाबा' (यक्ष) की प्रतिमा मिली है।
295. निम्नलिखित किस प्राचीन स्थल के उत्खनन में मालव जनपद की लौह सामग्री के विशाल संग्रह की जानकारी प्राप्त हुई है -
Answer: टोंक जिले में स्थित रैढ़ के उत्खनन से लौह सामग्री का विशाल भंडार मिला है, जिसके कारण इसे 'प्राचीन भारत का टाटानगर' भी कहा जाता है। यह क्षेत्र मालव जनपद का हिस्सा था।
296. ताम्रयुगीन स्थल झाड़ोल कहां स्थित है -
Answer: झाड़ोल, एक ताम्रयुगीन पुरातात्विक स्थल है जो राजस्थान के उदयपुर जिले में स्थित है।
297. निम्न में से कौन सा पुरावशेष कालीबंगा से सम्बन्धित नहीं है -
Answer: कालीबंगा से दुर्गीकरण, अग्निवेदी और मिट्टी के बर्तन मिले हैं, लेकिन यहाँ से शैल चित्रों (चट्टानों पर बने चित्र) के प्रमाण नहीं मिले हैं। शैल चित्र बैराठ जैसे स्थलों से प्राप्त हुए हैं।
298. निम्नलिखित में से किस सभ्यता को धूलकोट कहते हैं -
Answer: आहड़ का स्थानीय नाम 'धूलकोट' है, जिसका अर्थ 'धूल का टीला' होता है, क्योंकि यह सभ्यता एक पुराने टीले के नीचे दबी हुई मिली थी।
299. गणेश्वर-ज़ोधपुरा कॉपर कॉम्पलेक्स निम्नलिखित में से किस-किस मृद्भांड से सम्बंधित है -
Answer: गणेश्वर-जोधपुरा संस्कृति की पहचान एक विशेष प्रकार के गेरुए रंग के मिट्टी के बर्तनों (Ochre Coloured Pottery - OCP) से की जाती है।
300. राजस्थान के इन पुरातात्विक स्थलों में से कौन सा स्थल सिंधु घाटी सभ्यता का भाग नहीं था -
Answer: करनपुरा और कालीबंगा सीधे सिंधु घाटी सभ्यता से संबंधित हैं। आहड़ (अहार) एक अलग, समकालीन ग्रामीण ताम्रपाषाणिक संस्कृति थी, जो सिंधु घाटी सभ्यता का हिस्सा नहीं थी।