राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ
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311. गणेश्वर सभ्यता थी -
Answer: गणेश्वर सभ्यता एक प्राक्-हड़प्पा ताम्र युगीन सभ्यता थी, जहाँ से बड़ी मात्रा में तांबे के उपकरण प्राप्त हुए हैं।
312. शैल चित्र और पंचमार्क मुद्राओं के प्रमाण किस सभ्यता से मिले हैं -
Answer: बैराठ से प्रागैतिहासिक काल के शैल चित्र (रॉक पेंटिंग्स) और मौर्यकाल से संबंधित चांदी की पंचमार्क (आहत) मुद्राएं प्राप्त हुई हैं।
313. ब्राह्मी लिपि युक्त एक मिट्टी की मुहर कहाँ से प्राप्त हुई है -
Answer: टोंक के रैढ़ नामक पुरातात्विक स्थल से ब्राह्मी लिपि में 'मालव जनपदस' अंकित एक मिट्टी की मुहर प्राप्त हुई है।
314. निम्नलिखित में से कौन सा/से मध्यपाषाण स्थल राजस्थान में स्थित है/हैं -A. बागोरB. रत्नापुरC. तिलवाराD. लोटेश्वर
Answer: बागोर (भीलवाड़ा) और तिलवाड़ा (बालोतरा) दोनों राजस्थान में स्थित महत्वपूर्ण मध्यपाषाण (Mesolithic) कालीन स्थल हैं।
315. आहड़ संस्कृति के लोग निम्नाकित में से किस धातु से परिचित नहीं थे -
Answer: आहड़ के लोग तांबा गलाने और उसके उपकरण बनाने में माहिर थे। वे लोहे से भी परिचित हो चुके थे, लेकिन यहां से चांदी के उपयोग का कोई निश्चित प्रमाण नहीं मिला है।
316. आहड़ सभ्यता किस अन्य नाम से भी जानी जाती है -
Answer: दसवीं और ग्यारहवीं शताब्दी में आहड़ को 'आघाटपुर' या 'आघाटदुर्ग' के नाम से जाना जाता था, जो इसका एक प्राचीन नाम है।
317. आहड़ को ताम्रवती नाम से भी जाना जाता था क्योंकि -
Answer: आहड़ तांबे के अयस्क को गलाकर औजार और उपकरण बनाने का एक बड़ा केंद्र था। यहाँ से बड़ी संख्या में तांबे की वस्तुएं मिलने के कारण इसे 'ताम्रवती' कहा जाता था।
318. 300 ई. पू. से 300 ई. तक के काल के राजस्थान में गोल चैत्य कहाँ मिला है -
Answer: बैराठ की बीजक की पहाड़ी से मौर्यकालीन गोल बौद्ध चैत्यगृह (मंदिर) के अवशेष मिले हैं।
319. आहड़ का प्राचीन नाम था:
Answer: आहड़ का एक प्रमुख प्राचीन नाम 'ताम्रवती' था, जो यहाँ तांबे के व्यापक उद्योग को दर्शाता है।
320. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है -
Answer: आहड़ के लोग लाल और काले रंग के मृद्भांड (Black and Red Ware) का उपयोग करते थे। चित्रित धूसर मृद्भांड (Painted Grey Ware) का संबंध वैदिक काल से है, न कि आहड़ संस्कृति से।