किसान एवं आदिवासी आन्दोलन
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किसान एवं आदिवासी आन्दोलन
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राजस्थान में 1857 की क्रांति
राठौड़ वंश
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गठित संगठन
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QUESTION 251
विजयसिंह पथिक का मूल नाम क्या था -
Answer: विजय सिंह पथिक का वास्तविक नाम भूप सिंह गुर्जर था। उन्होंने फिरोजपुर षड्यंत्र केस से बचने के बाद अपना नाम बदलकर विजय सिंह पथिक रख लिया था।
QUESTION 252
‘मेवाड़ पुकार’ नामक 21 सूत्रीय माँगपत्र किसने तैयार किया था -
Answer: मोतीलाल तेजावत ने 'एकी आंदोलन' के दौरान मेवाड़ के महाराणा के समक्ष आदिवासियों और किसानों की समस्याओं को लेकर 21 मांगों का एक पत्र प्रस्तुत किया, जिसे 'मेवाड़ की पुकार' कहा जाता है।
QUESTION 253
मोतीलाल तेजावत की भील संबंधित गतिविधियां एकी आंदोलन के माध्यम से किस स्थान से शुरू हुई -
Answer: मोतीलाल तेजावत ने झाड़ोल ठिकाने में काम करते हुए भीलों की दुर्दशा देखी और यहीं से उन्होंने 'एकी आंदोलन' के माध्यम से भीलों को संगठित करना शुरू किया।
QUESTION 254
राजस्थान का पहला किसान आन्दोलन कौन सा था -
Answer: 1897 में शुरू हुआ बिजोलिया किसान आंदोलन, राजस्थान का पहला संगठित और सबसे लंबे समय तक चलने वाला किसान आंदोलन था।
QUESTION 255
‘नीमूचाणा हादसा’ कब हुआ था -
Answer: 14 मई, 1925 को अलवर के नीमूचाणा गाँव में बढ़ी हुई लगान दरों का विरोध करने के लिए एकत्रित हुए किसानों पर सेना ने गोलीबारी की, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए।
QUESTION 256
दूसरा जलियांवाला बाग काण्ड से संबोधित स्थल ‘नीमूचाणा’ किस जिले में है -
Answer: नीमूचाणा गाँव, जो किसान आंदोलन के नरसंहार के लिए जाना जाता है, राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है।
QUESTION 257
नीमुचणा कांड के समय अलवर का शासक कौन था -
Answer: नीमूचाणा हत्याकांड के समय अलवर के शासक महाराजा जयसिंह थे, जिनकी दमनकारी नीतियों के कारण यह घटना हुई।
QUESTION 258
‘पोपाबाई की पोल’ नामक पुस्तिका की रचना की गयी थी -
Answer: जयनारायण व्यास ने 'पोपाबाई की पोल' और 'मारवाड़ की अवस्था' जैसी पुस्तिकाओं के माध्यम से मारवाड़ रियासत के कुशासन को उजागर किया।
QUESTION 259
सन् 1947 ई. में वीरबाला कालीबाई किस घटना में शहीद हुई थी -
Answer: जून 1947 में डूंगरपुर के रास्तापाल गाँव में, अपने शिक्षक सेंगाभाई को बचाने के प्रयास में 13 वर्षीय भील बालिका कालीबाई पुलिस की गोलियों से शहीद हो गईं।
QUESTION 260
राजस्थान के किस किसान आंदोलन में सेवा संघ के साथ हुए समझौते को सरकार ने ‘बोल्शेविक’ फैसले की संज्ञा दी -
Answer: बेगूं के किसानों और ठिकाने के बीच हुए समझौते को मेवाड़ सरकार ने मानने से इनकार कर दिया और इसे रूस की 'बोल्शेविक क्रांति' की तरह एक खतरनाक फैसला बताकर रद्द कर दिया।