राजस्थान के लोक देवता व देवियाँ
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111. जाहरपीर के नाम से कौन से लोक देवता को जाना जाता है -
Answer: महमूद गजनवी से युद्ध करते समय गोगाजी की वीरता देखकर गजनवी ने उन्हें 'जाहरपीर' (साक्षात पीर) कहा था।
112. करणी माता मंदिर है -
Answer: करणी माता का विश्व प्रसिद्ध मंदिर, जो चूहों के लिए जाना जाता है, बीकानेर जिले के देशनोक नामक स्थान पर स्थित है।
113. रिखिया एवं नेजा निम्नलिखित में से किस लोक देवता से संबंधित हैं -
Answer: 'नेजा' रामदेवजी की ध्वजा है और 'रिखिया' उनके मेघवाल भक्तों को कहा जाता है।
114. राणी सती का मूल नाम क्या था -
Answer: राणी सती, जिनका मंदिर झुंझुनूं में है, का वास्तविक या मूल नाम नारायणी बाई था।
115. मंदिर श्री वीर तेजा जी, जो जोधपुर राज्य के महाराजा अभय सिंह द्वारा बनवाया गया था, राजस्थान के निम्नलिखित में से किस जिले में स्थित है -
Answer: तेजाजी का प्रसिद्ध पशु मेला परबतसर (नागौर) में लगता है। यहाँ के मंदिर का निर्माण जोधपुर के महाराजा अभय सिंह ने करवाया था।
116. तिलवाड़ा का मेला निम्नलिखित किस लोक देवता की स्मृति में भरता है -
Answer: बाड़मेर के तिलवाड़ा में लूनी नदी के किनारे लोक देवता मल्लीनाथजी की स्मृति में राजस्थान का सबसे प्राचीन पशु मेला आयोजित होता है।
117. कौन से लोक देवता भूंडेल से थे -
Answer: लोक देवता हड़बूजी सांखला का जन्म नागौर के भूंडेल (भुंडेल) गाँव में हुआ था।
118. किस लोक देवता की पत्नी उनकी मृत्यु के बाद सही हो गई -
Answer: तेजाजी की मृत्यु का समाचार सुनकर उनकी पत्नी पेमल उनकी चिता के साथ सती हो गईं थीं।
119. किस लोकदेवता की पत्नी ‘सती’ नहीं हुई -
Answer: पाबूजी की पत्नी फूलमदे, तेजाजी की पत्नी पेमल और गोगाजी की पत्नी केलमदे सती हुईं थीं, जबकि हड़बूजी ने विवाह नहीं किया था।
120. गायों की रक्षा में अपने प्राणोत्सर्ग करने वालों में कौन प्रसिद्ध है -
Answer: तेजाजी (लाछा गुर्जरी की गायें), पाबूजी (देवल चारणी की गायें) और गोगाजी (अपने मौसेरे भाइयों से गायें), इन सभी ने गायों की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था।