राजस्थान के लोक देवता व देवियाँ
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QUESTION 151
लोक देवता हरभूजी का मुख्य मन्दिर कहाँ स्थित है -
Answer: पंचपीरों में से एक, हड़बूजी का मुख्य मंदिर फलौदी के पास बेंगटी गाँव में है। यहाँ उनकी गाड़ी की पूजा होती है।
QUESTION 152
पोखरण के कुख्यात भैरव के प्रबल उत्पादों का समूल विनाश करने वाले थे -
Answer: लोककथाओं के अनुसार, रामदेवजी ने अपने बाल्यकाल में पोकरण क्षेत्र को भैरव नामक एक क्रूर तांत्रिक के आतंक से मुक्त कराया था।
QUESTION 153
उस राजा का क्या नाम था जिसे हड़बूजी ने आशीर्वाद देते हुए अपना खंजर भी उपहार में दिया था -
Answer: हड़बूजी ने राव जोधा को मंडोर विजय का आशीर्वाद दिया था और उन्हें एक कटार (खंजर) भेंट की थी। विजय के बाद, जोधा ने उन्हें बेंगटी गाँव भेंट किया।
QUESTION 154
प्लेग रक्षक एवं ऊंटों के देवता के रूप में प्रसिद्ध लोक देवता है -
Answer: पाबूजी को ऊँटों का देवता माना जाता है और साथ ही उन्हें प्लेग जैसी बीमारियों से बचाने वाले रक्षक देवता के रूप में भी पूजा जाता है।
QUESTION 155
लोकदेवता रामदेवजी ने किस सन् में जीवित समाधि ली थी -
Answer: रामदेवजी ने भाद्रपद शुक्ल एकादशी, विक्रम संवत 1515 (1458 ईस्वी) को रामसरोवर (रूणिचा) में जीवित समाधि ली थी।
QUESTION 156
बीकानेर राज परिवार की कुलदेवी ____ है।
Answer: हालांकि राठौड़ों की कुलदेवी नागणेची माता हैं, लेकिन बीकानेर के राठौड़ शासक करणी माता को अपनी इष्टदेवी या आराध्य देवी मानते हैं।
QUESTION 157
तेरहताली नृत्य में किस लोकदेवता का यशोगान किया जाता है -
Answer: कामड़ पंथ की महिलाएं बैठकर किया जाने वाला तेरहताली नृत्य लोक देवता रामदेवजी की आराधना में करती हैं।
QUESTION 158
सुमेलित कीजिए - कुलदेवी जाति (1) करणी माता (i) नाई (2) सकराय माता (ii) सीरवी (3) आई माता (iii) खण्डेलवाल (4) नारायणी माता (iv) चारण
Answer: सही मिलान है: करणी माता - चारण जाति की आराध्य देवी, सकराय माता - खण्डेलवाल समाज की कुलदेवी, आई माता - सीरवी जाति की कुलदेवी, और नारायणी माता - नाई समाज की कुलदेवी।
QUESTION 159
चारण जाति किस देवी को अपनी कुल देवी मानती है-
Answer: करणी माता का जन्म चारण जाति में हुआ था, इसलिए चारण जाति उन्हें अपनी आराध्य देवी मानती है।
QUESTION 160
निम्न में से किस देवता की फड़ सबसे प्राचीन व सबसे लम्बी है -
Answer: देवनारायणजी की फड़ सबसे लंबी, सबसे पुरानी और सर्वाधिक चित्रों वाली फड़ है। इसका वाचन जंतर वाद्य यंत्र के साथ किया जाता है।