राजस्थान के प्रमुख संत एवं सम्प्रदाय
TOPICS ▾
राजस्थान का संगीत एवं लोकगीत
राजस्थान का साहित्य
राजस्थान की चित्र शैलियाँ
राजस्थान की प्रसिद्ध महिला व्यक्तित्व
राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ
राजस्थान की भाषा एवं बोलियाँ
राजस्थान की शब्दावली
राजस्थान की स्थापत्य कला
राजस्थान की हस्तकला
राजस्थान के आभूषण एवं वेशभूषा
राजस्थान के क्षेत्रीय कार्यक्रम
राजस्थान के त्यौहार
राजस्थान के नृत्य
राजस्थान के प्रमुख व्यक्तित्व
राजस्थान के प्रमुख संत एवं सम्प्रदाय
राजस्थान के प्रमुख स्थानों के उपनाम
राजस्थान के मेले
राजस्थान के रीति-रिवाज एवं प्रथाएँ
राजस्थान के लोक देवता व देवियाँ
राजस्थान के सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल
SORT BY ▾
311. किस सम्प्रदाय में ‘जुगल सरकार’(सीता-राम) की पूजा की जाती है -
Answer: रामानुज संप्रदाय में भगवान राम और सीता की एक साथ 'जुगल सरकार' के रूप में पूजा करने की परंपरा है।
312. किस संत ने ‘संत गुन सागर’ और ‘नाम - माला’ की रचना की -
Answer: ‘संत गुन सागर’ और ‘नाम-माला’ संत दादू दयाल जी की प्रमुख रचनाओं में से हैं।
313. ये रामस्नेही सम्प्रदाय के संस्थापक माने जाते हैं -
Answer: रामस्नेही संप्रदाय की मुख्य पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा) के संस्थापक संत रामचरणजी थे।
314. कुणसे पंथ रा अनुयायी मेव मुसलमान घणा है -
Answer: लालदासी पंथ के अनुयायी मेवात क्षेत्र में अधिक हैं और इनमें मेव मुसलमान बड़ी संख्या में शामिल हैं।
315. सिंभूदड़ा एवं कोंडा ग्रंथों में किस संप्रदाय के उपदेश हैं -
Answer: सिंभूदड़ा और कोंडा, जसनाथी संप्रदाय के प्रमुख ग्रंथ हैं, जिनमें संत जसनाथ जी के उपदेश संग्रहीत हैं।
316. निम्नलिखित में से किस संप्रदाय के अनुयायी मेव भी हैं -
Answer: संत लालदास जी द्वारा प्रवर्तित लालदासी संप्रदाय में हिंदू और मेव मुसलमान दोनों ही अनुयायी हैं।
317. बालिन्दजी के गुरू कौन थे-
Answer: संत बालिन्दजी, प्रसिद्ध संत दादू दयाल जी के शिष्य थे।
318. रसिक संप्रदाय का प्रवर्तक कोन था -
Answer: रसिक संप्रदाय की स्थापना अग्रदास जी ने की थी, जिन्होंने भक्ति में माधुर्य भाव पर जोर दिया।
319. अब्दुल पीर की दरगाह कहां स्थित है -
Answer: अब्दुल पीर की प्रसिद्ध दरगाह राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के भगवानपुरा गांव में स्थित है।
320. राजस्थान के किस संप्रदाय के लोक पुरुषों द्वारा अग्नि नृत्य किया जाता है -
Answer: अग्नि नृत्य जसनाथी संप्रदाय के सिद्ध जाटों द्वारा किया जाता है, जिसमें वे धधकते अंगारों पर नृत्य करते हैं।