राजपूत युग
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1. राजपूतों की उत्पत्ति का अग्नि-कुंड सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया - Rajasthan Patwar Exam 2025 1st Shift
Answer: राजपूतों की उत्पत्ति का 'अग्निकुंड सिद्धांत' (Agni-kunda Theory) पृथ्वीराज चौहान के दरबारी कवि चन्द्र बरदाई ने अपनी प्रसिद्ध रचना 'पृथ्वीराज रासो' में दिया है। इस सिद्धांत के अनुसार, ऋषि वशिष्ठ ने आबू पर्वत पर एक यज्ञ किया था, जिसकी अग्नि से चार राजपूत वंशों—प्रतिहार, परमार, चालुक्य और चौहान की उत्पत्ति हुई थी।
2. निम्न में से किस हिन्दू सम्राट की मृत्यु के पश्चात् भारत में अनेक क्षेत्रीय राजवंशों का उदय हुआ -
Answer: हर्षवर्धन उत्तरी भारत के अंतिम महान सम्राट थे जिन्होंने एक विशाल साम्राज्य पर शासन किया। 647 ईस्वी में उनकी मृत्यु के बाद, कोई मजबूत केंद्रीय शक्ति नहीं बची, जिससे स्थानीय शासकों ने खुद को स्वतंत्र घोषित कर दिया और कई छोटे-छोटे राज्यों का उदय हुआ।
3. प्रतिहारों को वैदिक क्षत्रियों का वंशज किसने बताया-
Answer: इतिहासकार डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा का मानना था कि राजपूत विदेशी मूल के नहीं हैं, बल्कि वे भारत के प्राचीन वैदिक आर्य क्षत्रियों की संतान हैं। इसी आधार पर उन्होंने प्रतिहारों को वैदिक क्षत्रियों का वंशज बताया।
4. नयनचन्द सूरी द्वारा रचित ग्रन्थ हम्मीर महाकाव्य में राजपूतों की उत्पत्ति बताई गई है -
Answer: नयनचंद सूरी द्वारा लिखे गए 'हम्मीर महाकाव्य' में चौहान वंश के शासकों की वंशावली सूर्य से बताई गई है, अर्थात् उन्हें सूर्यवंशी माना गया है।
5. ‘राजपूत वैदिक आर्यो की संतान है’ - इस मत के प्रतिपादक है -
Answer: डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा इस मत के प्रमुख समर्थक थे कि राजपूतों की उत्पत्ति विदेशी जातियों से नहीं, बल्कि प्राचीन वैदिक आर्यों के क्षत्रिय वर्ण से हुई है।
6. किस इतिहासकार ने 7वीं सदी से 12वीं सदी तक के युग को राजपूत काल कहा था -
Answer: प्रसिद्ध इतिहासकार विंसेट स्मिथ ने उत्तर भारत में राजपूत वंशों के राजनीतिक प्रभुत्व के कारण 7वीं से 12वीं शताब्दी तक के समय को 'राजपूत काल' की संज्ञा दी थी।
7. पृथ्वीराज विजय के लेखक जयानक ने चौहानों को निम्न में से किसका वंशज बताया -
Answer: जयानक ने अपने ग्रंथ 'पृथ्वीराज विजय' में चौहानों की उत्पत्ति सूर्य से बताई है, इसलिए उन्हें सूर्यवंशी कहा गया है। यह राजघरानों द्वारा अपनी वैधता स्थापित करने का एक सामान्य तरीका था।
8. किन विद्वानों ने राजपूतों को सीथियन मानकर उन्हें मध्य एशिया से आया बताया -
Answer: कर्नल जेम्स टॉड और विलियम क्रुक जैसे यूरोपीय विद्वानों ने यह सिद्धांत दिया कि राजपूतों की उत्पत्ति मध्य एशिया से आई विदेशी जातियों, जैसे शक और सीथियन से हुई थी, जो बाद में भारतीय समाज में शामिल हो गए।
9. निम्न में से कौन से वंश की उत्पत्ति अग्निकुंड से नहीं हुई -
Answer: अग्निकुंड की अवधारणा के अनुसार, चार राजपूत वंशों - परमार, प्रतिहार, चौहान और चालुक्य (सोलंकी) की उत्पत्ति यज्ञ की अग्नि से हुई थी। सिसोदिया वंश स्वयं को सूर्यवंशी मानता है, न कि अग्निवंशी।
10. ‘पृथ्वीराज रासो’ ग्रंथ में राजपूतों की उत्पत्ति बताई गई है -
Answer: चंदबरदाई द्वारा रचित 'पृथ्वीराज रासो' में यह वर्णन है कि गुरु वशिष्ठ ने आबू पर्वत पर एक यज्ञ किया था, जिसकी अग्नि से चार राजपूत वंशों (प्रतिहार, परमार, चालुक्य और चौहान) का उदय हुआ।
11. निम्नलिखित में किसने राजपूतों की उत्पत्ति विदेशी जातियों से बताई -
Answer: कर्नल टॉड, विलियम क्रुक और डॉ. डी. आर. भंडारकर, इन सभी इतिहासकारों ने यह मत दिया कि राजपूतों की उत्पत्ति विदेशी जातियों (जैसे शक, हूण, कुषाण) से हुई थी जो भारत आकर बस गए थे।
12. निम्न में से किस इतिहासकार ने राजपूतों को शक अथवा सिथियन जाति के वंशज माना है -
Answer: कर्नल जेम्स टॉड इस सिद्धांत के मुख्य प्रतिपादक थे। उनका मानना था कि राजपूत प्राचीन काल में भारत पर आक्रमण करने वाली सिथियन (शक) जनजातियों के वंशज हैं।
13. इतिहासकार आर. सी मजूमदार के अनुसार गुर्जर प्रतिहारों ने कितनी शताब्दी तक अरब आक्रमणकारियों के लिए बाधक का काम किया-
Answer: इतिहासकार आर. सी. मजूमदार का मानना है कि गुर्जर-प्रतिहार शासकों ने अपनी शक्ति से लगभग छठी से बारहवीं शताब्दी तक अरब आक्रमणकारियों को भारत में आगे बढ़ने से रोके रखा और एक मजबूत बाधा के रूप में काम किया।
14. गुर्जर-प्रतिहार शासक इस नाम से भी जाने जाते हैं -
Answer: पृथ्वीराज रासो में वर्णित अग्निकुंड की कथा के अनुसार, गुर्जर-प्रतिहार उन चार राजपूत वंशों में से एक थे जिनकी उत्पत्ति गुरु वशिष्ठ के यज्ञ-कुंड से हुई थी। इसलिए उन्हें अग्निकुंड राजपूत भी कहा जाता है।
15. किस इतिहासकार ने चौहानों को ब्राह्मण वंश से उत्पन्न होना माना है -
Answer: डॉ. डी. आर. भंडारकर ने बिजौलिया शिलालेख जैसे अभिलेखों के आधार पर यह मत दिया कि चौहानों की उत्पत्ति ब्राह्मण वंश से हुई थी, क्योंकि शिलालेख में उन्हें 'वत्स गोत्र' का 'विप्र' (ब्राह्मण) बताया गया है।
16. भारतीय इतिहास में राजपूत वंशों का प्रभुत्व _____ तक की अवधि के दौरान था।
Answer: सम्राट हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद और दिल्ली सल्तनत की स्थापना से पहले, यानी लगभग 8वीं से 12वीं शताब्दी तक, उत्तर भारत की राजनीति में राजपूत वंशों का वर्चस्व था।
17. नैणसी री ख्यात में गुहिलों की कितनी शाखाओं का उल्लेख मिलता है -
Answer: 17वीं शताब्दी के इतिहासकार मुहणोत नैणसी ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ 'नैणसी री ख्यात' में मेवाड़ के गुहिल राजवंश की कुल 24 शाखाओं का वर्णन किया है।
18. इतिहासकार आर. सी. मजूमदार के अनुसार गुर्जर प्रतिहारों ने कितनी शताब्दी तक अरब आक्रमणकारियों के लिए बाधक का काम किया -
Answer: इतिहासकार आर. सी. मजूमदार ने इस बात पर जोर दिया है कि गुर्जर-प्रतिहारों ने छठी से बारहवीं शताब्दी तक सिंध से आगे अरबों के विस्तार को सफलतापूर्वक रोका, जिससे वे भारतीय सीमा के रक्षक बने।
19. चीनी यात्री फा फाह्यायन ने राज्य के किस नगर की यात्रा की थी -
Answer: हालांकि भीनमाल की यात्रा का स्पष्ट ऐतिहासिक प्रमाण चीनी यात्री ह्वेनसांग (Xuanzang) के विवरण में मिलता है, जिसने इसे गुर्जर साम्राज्य की राजधानी बताया। कुछ संदर्भों में फाह्यान का भी इस क्षेत्र से गुजरना माना जाता है।
20. चीनी यात्री ह्वेनसांग ने गुर्जरों की राजधानी का नाम बताया था -
Answer: चीनी यात्री ह्वेनसांग (Xuanzang) ने लगभग 641 ईस्वी में गुर्जर राज्य की यात्रा की और अपनी यात्रा के रिकॉर्ड में राजधानी भीनमाल का उल्लेख 'पी-लो-मो-लो' के रूप में किया।